दृढ़ संकल्प ने बदली जिंदगी : शराब छोड़कर सत्यदेव पटवा बने सफल उद्यमी, दर्जनों लोगों को दिया रोजगारबबुरी (चंदौली)।
कहते हैं कि यदि इंसान के भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी बुरी आदत उसकी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। बबुरी कस्बे के सत्यदेव पटवा ने अपने जीवन से इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। कभी शराब की लत में पूरी तरह डूबे रहने वाले सत्यदेव आज न केवल एक सफल व्यवसायी हैं, बल्कि अपने प्रतिष्ठान और स्कूल ड्रेस निर्माण इकाई के माध्यम से दर्जनों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
करीब 23 वर्ष पहले सत्यदेव पटवा की दिनचर्या शराब के बिना शुरू ही नहीं होती थी। सुबह उठते ही शराब पीना उनकी आदत बन चुकी थी। धीरे-धीरे उनकी इस लत से पूरा परिवार परेशान रहने लगा। पत्नी आरती देवी चार बच्चों के पालन-पोषण और घर के खर्च को लेकर हमेशा चिंतित रहती थीं। कॉपी-किताब की छोटी सी दुकान बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी। दुकान की कमाई से अधिक पैसा शराब पर खर्च हो जाता था। हालात इतने बिगड़ गए कि घर का सामान तक बेचने की नौबत आ गई और परिवार की जमीन भी बिक गई।इसी दौरान एक दिन सत्यदेव पटवा बाबा जयगुरूदेव के सत्संग में पहुंचे। वहां मिली आध्यात्मिक प्रेरणा ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने उसी दिन जीवनभर शराब का सेवन न करने का दृढ़ संकल्प लिया।
सत्यदेव बताते हैं कि उस समय वे प्रतिदिन लगभग 12 बोतल शराब पी जाते थे। शराब छोड़ने के बाद शुरुआती छह महीने बेहद कठिन रहे। बेचैनी रहती थी, रातों की नींद गायब हो गई थी और बार-बार नशे की तलब उठती थी। लेकिन नियमित सत्संग और मजबूत संकल्प ने उन्हें टूटने नहीं दिया। धीरे-धीरे छह महीने बाद उनकी स्थिति सामान्य हो गई और नशे की इच्छा हमेशा के लिए समाप्त हो गई। तब से लेकर आज तक उन्होंने होली, शादी-ब्याह या किसी भी अवसर पर शराब को हाथ तक नहीं लगाया।आज सत्यदेव पटवा का कारोबार नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। उनकी तीन दुकानें संचालित हैं, जहां थोक एवं फुटकर में किताबें, स्टेशनरी, खेलकूद सामग्री और स्कूल ड्रेस की बिक्री होती है। इसके अलावा उनका स्कूल ड्रेस निर्माण कारखाना भी संचालित है, जिसमें लगभग दो दर्जन लोगों को रोजगार मिला हुआ है। व्यवसाय में कई कर्मचारी कार्यरत हैं। सत्यदेव पटवा बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब उनकी पत्नी बच्चों के साथ इस इंतजार में रहती थीं कि दुकान से कुछ सामान बिके तो घर का राशन आ सके। वहीं आज उनके पास चारपहिया वाहन, कई मकान, भूमि और एक सुव्यवस्थित कारोबार है। उनका मानना है कि दृढ़ संकल्प, सत्संग की प्रेरणा और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति किसी भी बुरी लत से बाहर निकलकर नई जिंदगी की शुरुआत कर सकता है।

