
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद के आह्वान पर वाराणसी में भी बन्द का दिखा असर
वाराणसी । देश में नए कृषि कानून को लेकर सरकार और किसानों का गतिरोध अब सड़क पर आ गया है।देश भर में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद के आह्वान पर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी भारत बंद का असर दिखा ।सब्जी विक्रेताओं ने सब्जी मंडी बन्द करके किसानों के भारत बंद के आह्वान का समर्थन किया ।संयुक्त किसान मोर्चा के साथ अन्य संगठनों ने भी जोर-शोर से भारत बंद के आह्वान का समर्थन किया और अपनी भागीदारी दर्ज करायी ।वाराणसी में बी एच यू गेट पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए ऐपवा की ओर से कुसुम वर्मा ने कहा कि भूख का सवाल देश के लिए कई गंभीर चुनौतियों को लेकर आएगा,सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है,जिसमे देश की आवाम को एक बार फिर गुलामी की ओर धकेला जा सके ।आजाद भारत मे यह कत्तई स्वीकार नही है कि रोटी के सवाल का हल ढूढ़ने के लिए निजी कंपनियों पर आश्रित हुआ जाए ,इसलिए देश की महिलाएं भी अब किसान आंदोलन में चढ़- बढ़ कर अपनी भागीदारी दर्ज कराने के लिए तैयार है ।
समाजवादी जनपरिषद के नेता अफलातून ने कहा कि सरकार सुनियोजित तरीके से रोटी को उद्योगपतियों की कैद में रखना चाहती है ।भूख का सवाल केवल किसानों का ही नही बल्कि यह पूरे देश का सवाल है ।जिस पर किसानों के हक में खड़े होकर निजी कंपनियों के इशारे पर चलने वाली सरकार का मुकाबला करना होगा ।उन्होंने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को भी इस आन्दोलन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि आप भी किसान परिवार से आते है रोटी का सवाल आपके लिए भी है ।जब आप पुलिस की नौकरी में आये इससे पूर्व भी आपने जो भी परीक्षाएं दिया उसमे भी संवैधानिक मूल्यों से जुड़े हुए सवाल आते है,जिससे आप लोग भी पूर्ण रूप से परिचित है और केंद्र एवं राज्य के विषय को भली-भांति समझते है ।देश की सुरक्षा के साथ – साथ नागरिकों के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का दायित्व भी आपका है ।इसलिए भारत बंद के समर्थन में हम सब संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आपका भी स्वागत करते है ।
सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व छात्र नेता चौधरी राजेन्द्र ने कहा कि नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के सांठ-गांठ से चलने वाली सरकार ने किसानों को सड़क पर रोटी के सवाल पर लड़ने के लिए अब मजबूर कर दिया है ,इसलिए अब देश का दायित्व है कि ऐसी किसान विरोधी व्यवस्था के खिलाफ जंग छेड़ी जाय और सत्ता से बेदखल किया जाय ।उन्होंने उदारीकरण का जिक्र करते हुए आगे कहा कि उन लोगों को उदारीकरण से देश में किसानों के आत्महत्या का भी आकलन कर लेना चाहिए ।जिन्होंने बेकसूर बाबरी विध्वंश के बहाने देश के ऊपर उदारीकरण को थोपा, और अब काले कृषि कानून को लागू करके किसको मजबूत करने का मंसूबा बना रहे है ,इस पर देश की नई पीढ़ी को नजर रखनी होगी ।सत्ता में बैठे ऐसे लोगों की भी जवाबदेही देश तय करेगा जिन्होंने देश को आत्मनिर्भर का नारा देते हुए अब देश के खेती -किसानी को पूंजीपतियों के हाथों गुलाम बनाने का मॉडल खींच रहे है ।
बी एच यू की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रतिमा गोंड ने कहा कि देश मे संवैधानिक मूल्यों को समान रूप से तभी लागू किया जा सकता है जब गैर-बराबरी के विषय को खत्म किया जाय ।फ्रांस में गैर-बराबरी का सवाल जब खड़ा हुआ तो उस देश के सशस्त्र बलों सहित पुलिस कर्मियों ने भी देशहित के लिए देश विरोधी सत्ता के खिलाफ अपने शस्त्र को रखकर आंदोलन का हिस्सा बन गए ,उन्होंने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से कहा कि आप सभी हमारे भाई है और किसानों के सवाल से परिचित है ,इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान के समर्थन की आप से भी अपेक्षा है ।
बी एच यू की छात्र संगठन स्टूडेंट फॉर चेंज की ओर से इशिप्ता ने कहा कि हम युवाओं के कंधे पर देश की बड़ी जिम्मेदारी है और भूख के सवाल पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ हम अपने भविष्य की लड़ाइयों को और मजबूत करेंगे ।
सभा में डॉ नूर फातमा, डॉ डॉ मुनीज़ा खान, रामजन्म यादव, लक्ष्मण मौर्य,सुतप्पा,विमला ने भी अपने विचार को व्यक्त किया ।
अधिवक्ताओं ने भी भारत बंद का किया समर्थन :
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद के आह्वान पर किसान आंदोलन के समर्थन में अधिवक्ता सदस्य वाराणसी के नेतृत्व में वाराणसी के अधिवक्ताओं ने विरोध मार्च ,धरना , सभा करके किसानों को अपना समर्थन दिया तथा वाराणसी जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि तीनों किसान विरोधी कृषि कानूनों की वापसी व एमएसपी की कानूनी गारंटी तक किसानों के आंदोलन को समर्थन जारी रहेगा । भारत बंद के आह्वान पर प्रेम प्रकाश सिंह यादव एडवोकेट के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा को अपना समर्थन देते हुए जिलाधिकारी कार्यालय वाराणसी पर इकट्ठा होकर तीनों किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लो – वापस लो, एमएससी को कानूनी गारंटी दो -गारंटी दो , अडानी – अंबानी, आर एस एस की दलाली बंद करो- बंद करो, पुलिस के बल पर गुंडागर्दी नहीं चलेगी – नहीं चलेगी, दमन के बल पर यह सरकार नहीं चलेगी – नहीं चलेगी, निजीकरण बंद करो – बंद करो, जातिगत जनगणना लागू करो- लागू करो के नारे लगाए ।मार्च कचहरी हॉस्पिटल, कचहरी साइकिल स्टैंड होते हुए मार्च निकाला जो जिला मुख्यालय पर पहुंचते ही सभा में तब्दील हो गया ।
आंदोलन नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने कहा कि यह सरकार किसान विरोधी व जनविरोधी है , यह पूजीपतियों व मनुवादी ताकतों की गुलाम है। दिल्ली बॉर्डर पर शहीद हुए किसानों के परिवार के दर्द का एहसास इस सरकार को नहीं है ।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जो किसान विरोधी कृषि कानून लाया है, उसका पहला कानून पूंजीपतियों को आवश्यक वस्तुओं का असीमित भंडारण व कालाबाजारी करने का अधिकार देता है।
दूसरे कानून के जरिये किसानों की खेती को ठेके पर देने का प्रावधान सरकार द्वारा किया जा रहा है ,किसानों को अपनी भूमि को निजी कंपनियों को ठेके पर सरकार द्वारा सौपने के लिए मजबूर किया जाएगा ।
तीसरा कानून सरकारी किसान मंडियों को खत्म करके पूंजीपतियों की प्राइवेट मंडियों को गैर कानूनी तरीके से स्थापित करने का प्रावधान है ,जिसमें सभी सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी और पूंजीपतियों का मंडियों पर वर्चस्व कायम हो जाएगा और देश मे भूख का सवाल खड़ा होगा।अधिवक्ता समाज कभी भी इसे लागू नही होने देगा ,इसके लिए किसानों को हर तरह से सहयोग दिया जाएगा । दिल्ली में धरनारत किसानों की शहादत बेकार नही जाएगी इस लड़ाई को देश से पूंजीपतियों के इशारे पर चलने वाली सरकार को खत्म करके ही किया जाएगा ।
धरना को मनमोहन गुप्ता, बनारस बार के पूर्व उपाध्यक्ष वकार अहमद सिद्धकी, सेंट्रल बार के पूर्व कोषाध्यक्ष एडवोकेट राम रेणु चंदन, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहसिन रजा, एडवोकेट कार्तिकेय, एडवोकेट शान, एडवोकेट अजीत सिंह यादव , एडवोकेट वीरेन्द्र , एडवोकेट राजीव , एडवोकेट वीर बली सिंह यादव , एडवोकेट अवधेश , एडवोकेट राजनाथ, एडवोकेट बलवंत सहित दर्जनों अधिवक्ताओं ने संबोधित किया ।
