चंदौली। मां बागेश्वरी देवी परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में गुरुवार को कथा के सप्तम दिवस पर श्रद्धालुओं ने भक्ति और ज्ञान का रसपान किया। कथा व्यास पंडित कामोद मिश्र शास्त्री ने धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से समाज में बढ़ रही कुरीतियों और भ्रामक धार्मिक प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से सनातन मूल्यों के पालन का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति भगवान राम और श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण में निहित है। व्यास जी ने कुछ प्रचलित धार्मिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में अखंड विग्रह की पूजा का विशेष महत्व है तथा धार्मिक आस्था को शास्त्रीय मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए। कथा के दौरान पौंड्रक प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि स्वयं को भगवान घोषित करने वाले व्यक्तियों का अंत सदैव दुखद होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने पौंड्रक का वध कर सत्य और असत्य के अंतर को स्पष्ट किया था। राजा परीक्षित और कलियुग के संवाद का उल्लेख करते हुए व्यास जी ने बताया कि जुआ, व्यभिचार, मद्यपान और हिंसा कलियुग के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि इन बुराइयों से दूर रहकर ही व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। उद्धव और गोपियों के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने ज्ञान और भक्ति के महत्व को समझाया। वहीं शिशुपाल वध की कथा सुनाकर बताया कि सहनशीलता की भी एक सीमा होती है और अधर्म का समय पर प्रतिकार आवश्यक है। कथा के अंत में उन्होंने समाज को सदाचार, संयम और धर्ममय जीवन अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण कुमार पाण्डेय ने किया।
