- ✍ सम्पादक , राष्ट्र संदेश
चंदौली जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के जीत के उतने चर्चे नहीं हैं, जितने समाजवादी पार्टी की ‘हार के पहले और बाद’ उपजे विवादों के हैं । फिलहाल जनपद में सपा दो खेमों में बंट चुकी है । एक पूर्व सांसद रामकिशुन यादव के तथा दूसरी जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंद्रशेखर यादव के ।
चंद्रशेखर यादव के समर्थन को लेकर सपा जिलाध्यक्ष सत्य नारायण राजभर की भी जनपद में खुब चर्चा है । चुनाव के दिन , चंद्रशेखर यादव द्वारा पूर्व सांसद पर बिकने के आरोप वाले वीडियो में साथ खड़े जिलाध्यक्ष सत्य नारायण राजभर ने चंद्रशेखर यादव को रोकने की कोई जरूरत नहीं समझी । यह जानते हुए भी कि इससे समाजवादी पार्टी की छवि को वह नुकसान पहुंच रहा है जिसकी भरपाई शायद 2022 की चुनाव में हार का मुंह देखकर करना पड़े । किसी पार्टी का जिलाध्यक्ष जनपद में पार्टी की छवि बनाने में सबसे बड़ा मददगार होता है । लेकिन यहाँ तो सब कुछ उल्टा ही होता रहा ।
खैर , आगे बढ़ते हैं, वीडियो में हमने देखा पूर्व सांसद पर चंद्रशेखर यादव बराबर बिकने का आरोप लगा रहे हैं तथा अपने साथ सपा के चौदह सदस्य होने का दम भर रहे हैं । वे बेहद आक्रामक लहजे में यह भी कह रहे हैं कि जो बिका गया है वह मुंह छिपाए हुआ है , सामने क्यो नही आता ? जो पैसा लेकर बिक गया हो वो हम लोगों पर ब्लेम करेगा !….बात सही है, पर इस वीडियो के उलट विचार करने वाली बात ये है कि चंद्रशेखर यादव के साथ “ईमानदार” सपा सदस्य, जिनकी संख्या वे चौदह बता रहे हैं, मतदान के दौरान चार की संख्या में कैसे सिमट जाते हैं । अब सवाल यह उठता है कि बिका कौन ? वह जो समाजवादी पार्टी की लाज बचाने के लिए सदस्यों के पैरो पर गिरा माथा रगड़ रहा था या फिर वो जो बिकने खरीदने की बात करते करते चौदह से चार पर आ कर टिक गये ? मसला ये भी बाद के लिए रखते हैं । चर्चा करते हैं हम चुनाव के ठीक पहले की । जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव नहीं, जिला पंचायत सदस्य चुनाव के पहले की । समाजवादी पार्टी के समर्थित प्रत्याशी बनने को लेकर प्रत्याशियों मे कितनी होड़ मची थी । लाल कुर्ता और समाजवादी गमछा कंधे पर टाँगे मीठी बोली में “जी भाई जी” बोलते हुए शहद टपकाने वाले और समाजवादी पार्टी के बैकग्राउण्ड पर “आपकी सेवा में तत्पर” का स्लोगन लिखने वाले लोग पार्टी के प्रति कितनी ईमानदारी रखते हैं ये जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में स्पष्ट हो गया । भले ही पूर्व सांसद रामकिशुन यादव अपने भतीजे को जिताने और समाजवादी पार्टी की नजर में अपनी छवि बनाने के लिए स्टंट कर रहे हो, लेकिन एक बात तो एकदम सही है कि वो सपा के प्रत्याशी के लिए सदस्यों के पैरों पर माथा रगड़ रहे थे । अगर इस बात का भी सदस्यों ने लाज रख लिया होता तो शायद आज तस्वीर दूसरी होती । बहरहाल जिले में दोनो पक्षों के समर्थक अपनी पूरी निष्ठा के साथ अपने- अपने नेता के बचाव में हैं । देखते हैं 2022 तक जिले में सपा का बिखराव खतम होता है या सपा ??
