
वाराणसी । संतुष्टि अस्पताल और मेडिकल छात्रों का विवाद लगातार गहराता जा रहा है । इस मामले में पूर्व आई पी एस अमिताभ ठाकुर एवं उनकी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता तथा उच्च न्यायालय लखनऊ की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर ने डी एम एवं पुलिस कमिश्नर वाराणसी को पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले को संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है ।
हालांकि मामले पर राजनीतिक दबाव एवं प्रशासन की शिथिलता को देखते हुए छात्रों ने संतुष्टि अस्पताल से लेकर स्थानीय सुंदरपुर पुलिस चौकी तक मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया ।छात्रों ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि हम लोग पिछले 12 दिन से लागातार अपने साथ हुए धोखाधड़ी के मामले पर अस्पताल के खिलाफ धरना दे रहे है लेकिन पुलिस प्रशासन एवं शासन की ओर से उनकी मांग पर ध्यान नही दिया जा रहा है बल्कि वाराणसी पुलिस के आला अधिकारी मेडिकल छात्रों को ही उल्टा एन एस ए एवं विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके जेल भेजने की धमकी दे रहे है ।प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में वाराणसी की स्वच्छता अभियान की ब्रांड अम्बेसडर डॉ रितु गर्ग ने सुनियोजित तरीके से हमारे साथ धोखाधड़ी किया है ।जिसके साक्ष्य हम लोगों ने पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध भी करा दिया है ,इसके बावजूद भी डॉ रितु गर्ग के खिलाफ मामला दर्ज करने के बजाय उल्टा हमपर ही दबाव बनाया जा रहा है।यहाँ हम लोगों के साथ सरासर अन्याय और खुली लूट हो रही है इसके बावजूद अभी तक कोई कारवाई न होना हम सबके समझ के बाहर है।
क्या है मामला
वाराणसी शहर के सुंदरपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत नेवादा में स्थित संतुष्टि अस्पताल का मेडिकल कालेज मीरजापुर के डगमग पुर में स्थित है । छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन ने 2018 में मान्यता रदद् होने के बावजूद हम लोंगो को अंधेरे रखकर हमारा एडमिशन किया । हमसे लगातार फीस की वसूली भी किया गया । इसके बावजूद वर्ष 2018 से अब तक हमारी न तो कोई परीक्षा कराई गई और न ही अस्पताल प्रबंधन मामले पर खुलकर कोई जवाब देना चाहता है।जब मामला हाईकोर्ट में लंबित था तो अस्पताल ने हम लोगो को अंधेरे में रखकर क्यों एडमिशन लिया ? इसमें हम लोगों का क्या कुसूर है ? जिसपर प्रशासन और शासन हमारी सुन नही रहा है ,अब हम किससे न्याय की उम्मीद रखे ?
