
अन्याय के खिलाफ प्रतिकार की प्रतीक हैं यह नारी शक्ति । भिक्षुक बच्चों के उत्थान, शिक्षा, पुनर्वास संस्कार के लिए रहती हैं प्रयासरत
वाराणसी। वह चाहतीं तो लगभग एक दशक पहले एक झटके में ही लखपति बन जातीं। वह चाहती तो खुद को परिवार तक सीमित होकर एक बेहतर जिंदगी गुजारतीं। मगर राज्यीय प्रतिष्ठित सर्विस को दरकिनार कर वह समाज के दबे कुचलों की आवाज़ बनना उन्हें भाया। जिले के सुंदरपुर की रहने वाली प्रतिभा सिंह अन्याय के खिलाफ बिगुल फूंकने के लिए जानी जाती हैं।
ऐसे बदला जिन्दगी का मकसद
वर्षों पूर्व एक बार यह ऑटो से कहीं सफ़र कर रहीं थीं। रास्ते में चेकिंग के नाम पर एक परिवहन अधिकारी के पाले गुर्गे उस ऑटो चालक को जबरन ऑटो से उतारकर ले गये और प्रतिभा और उनकी बहन को ऑटो से उतर जाने को बोले । प्रतिभा ने जब नियम कानून और उनका परिचय पूछा तो वह सब अकड़ने लगे की हम ‘फला साहब’ के आदमी हैं। प्रतिभा भी अड़ गयीं और सीधे ट्रैफिक पुलिस लाईन पहुँच गयीं। वहां वह परिवहन अधिकारी को बुलाने पर अड़ी तो मजबूरन परिवहन अधिकारी को आना पड़ा ।
पहले तो वह धौंस जमाया मगर जब तमाम मीडिया वाले जुट गये और उन दोनों परिवहन अधिकारी के गुर्गों ने मीडिया के सामने उस अधिकारी की पोल खोल दी तो वह कांपने लगा। वह अपने लोगों से एक मोटी गड्डी का ऑफर किया तो प्रतिभा सिंह बिफ़र पड़ीं। उस अधिकारी के खिलाफ रातों रात मुकदमा दर्ज हो गया। बाद में वह अपने बचाव के लिए वह प्रतिभा को धमकाना चाहा, लखपति बनाना चाहा। मगर मजबूत इरादों की प्रतिभा न डरीं न डिगीं। अभी हाल ही में प्रतिभा सिंह एक हॉस्पिटल के छात्रों के साथ उसके प्रबंधन द्वारा किये जा रहे अन्याय और एक रेप पीड़िता को न्याय के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चला रही थीं । जिसका नतीजा सकारात्मक आया।
बाल भिक्षुओं को भिक्षा नहीं शिक्षा पर करती हैं काम
कई वर्षों से कटोरा थामने वाले हाथों को कलम पकड़ाने, उन्हें पढ़ाने, उनकी जिंदगी संवारने में लगी प्रतिभा सिंह इसपर काम कर रही हैं। वह आसपास के गरीब बच्चे जिनसे उनके माता पिता भिक्षा मंगवाते थे । उन्होंने उनके परिजनों को समझाया और बच्चों को अपने घर पर बुलाकर पढ़ाने लगीं। हालांकि उन बच्चों के माता पिता उन्हें पढ़ाने भेजकर अपनी आमदनी का एक जरिया नहीं बन्द करना चाहते थे। प्रतिभा सिंह ने उन बच्चों को भोजन कपड़े की व्यवस्था करने लगीं । धीरे धीरे बच्चे बढ़ने और पढ़ने लगे। यही नहीं प्रतिभा ने कई गरीब परिवार की बेटियों की शादी भी कराई है। आज भी प्रतिभा सिंह हर जरूरतमंद शोषित पीड़ित की मदद के लिए लगी रहती हैं। इस काम में उनके पति का भरपूर सहयोग मिलता है। प्रतिभा अपने पति के आमदनी का एक हिस्सा समाजसेवा में खर्च करती हैं।
