
वाराणसी । वाराणसी के पहड़िया स्थित अशोका इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट के सिविल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के मौके पर ग्रीन बिल्डिंग्स पर अपना प्रजेंटेशन दिया और कहा कि भारत में इस तकनीक का क्रेज बढ़ रहा है। ग्रीन बिल्डिंग्स के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। हमारे देश ने यह मुकाम महज आठ साल में हासिल किया है। इस मामले में सिर्फ अमेरिका ही हमसे आगे है। भारत ने ऐसी ग्रीन बिल्डिंग्स को बनाने में कामयाबी हासिल की है जिस पर बहुत कम लागत आएगी। 
सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष धर्मेंद्र दुबे के निर्देशन में अशोका इंस्टीट्यूट में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में चौदह छात्रों ने प्रजेंटेशन दिया। छात्रों ने बताया कि ग्रीन बिल्डिंग की डिजाइन से लेकर निर्माण और रखरखाव तक में पर्यावरण का खास ख्याल रखा जाता है। ऐसी इमारतें बिजली, पानी और अन्य संसाधनों की अधिक से अधिक बचत कर प्रदूषण पर लगाम कसने में मददगार साबित होती हैं। इन बिल्डिंग्स को ग्रीन कंस्ट्रक्शन या सस्टेनेबल बिल्डिंग्स के नाम से भी जाना जाता है। मौजूदा समय में दुनिया में बिजली की 40 फीसदी खपत और कार्बन डाईऑक्साइड के 24 फीसदी उत्सर्जन के लिए परंपरागत बिल्डिंग्स जिम्मेदार हैं।स्टूडेंट्स ने कहा कि औद्योगिकरण के दुष्परिणामों को जानने के बाद भारत के लोग एनवायर्नमेंट के प्रति जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में ग्रीन बिल्डिंग न केवल देश में बल्कि दुनिया भर की पहली पसंद बन चुकी है। अगले कुछ सालों में एनवायर्नमेंट फ्रेंडली निर्माण दर 20 से 25 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी।
स्टूडेंट्स ने कहा कि समान्य भवनों की तुलना में ग्रीन बिल्डिंग्स में कम पानी लगता है। प्राकृतिक ऊर्जा का ज्यादा उपयोग होता और प्राकृतिक संसाधनों की बचत भी होती है। ऐसी इमारतों में रहने वालों को स्वस्थ वातावरण मिलता है। ग्रीन बिल्डिंग एक साधारण घर के मुकाबले 30 से 40 फीसदी बिजली की बचत करता है। वहीं, 30 से 70 फीसदी तक पानी की बचत भी करता है। सिविल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष धर्मेंद दुबे ने बताया कि भारत में ग्रीन बिल्डिंग्स की शुरुआत साल 2001 में हैदराबाद के सीआईआई-सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर के निर्माण के साथ हुई थी। शुरुआत में ग्रीन बिल्डिंग्स की लागत आम बिल्डिंग्स के मुकाबले करीब 18 फीसदी ज्यादा थी लेकिन, टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल से अब यह अंतर महज पांच फीसदी तक रह गया है। कार्यक्रम में विक्की पाठक, चंद्रकांत वर्मा, निखिलेश गुप्ता, अनामिका यादव, श्रुति स्नेहा, हिमांशु प्रकाश, संजीव मौर्य, शुभम मौर्य, सरफराज अनवर रजा के प्रजेंटेशन को काफी सराहा गया। इस मौके पर सिविल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रशांत गुप्ता, राहुल सिंह, तुसार पटेल, शुभम विश्वकर्मा और शाहरूख अली ने भी ग्रीन बिल्डिंग्स के महत्व को विस्तार से रेखांकित किया।
