

राष्ट्र संदेश की श्रावण मास श्रृंखला “कण कण में शिव” में आप का स्वागत है । इस सोमवार हम आप को दर्शन करा रहे हैं चंदौली जनपद के सदर विकास खण्ड स्थित बबुरी गांव के प्राचीन पोखरा स्थित नर्मदेश्वर महादेव की ।
इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग की एक ऐसी विशेषता है जो सामान्यतः अन्य शिवालयों में नहीं देखी जाती । नर्मदेश्वर महादेव का शिवलिंग शिव व पार्वती का मिश्रित स्वरूप है। लोग इन्हें अर्धनारीश्वर रूप में भी पूजते हैं । शिव लिंग का आधा स्वरूप शिव के रूप में साँवला तो आधा स्वरूप शक्ति के रूप में गौरांग है ।
बबुरी कस्बे के प्राचीन पोखरा स्थित यह शिव मंदिर लगभग दो सौ साल पुराना है। इस मंदिर मे स्थानीय लोगों की आस्था इतनी प्रगाढ़ है कि अधिकांश श्रद्धालु अपनी दिनचर्या का सबसे अधिक समय भगवान भोलेनाथ की आराधना में व्यतीत करते हैं। पूरे साल यहाँ भक्तों का ताता लगा रहता है। इस मंदिर के अस्तित्व की बात की जाय तो यह मंदिर लगभग दो सौ साल पहले अस्तित्व में नहीं था ।

बबुरी के पोखरे के किनारे सुनसान पडा यह स्थान लोगों को दिन में भी भयावह लगता था । कस्बे के वैश्य समाज के शिव गुलाम साव की वह जमीन कभी कभार ही परिवार द्वारा इस्तेमाल की जाती थी । पोखरे के नजदीक उक्त स्थान के होने के कारण शिव गुलाम साव का, रोज तालाब में नहाना और उस स्थान पर समय बिताना दैनिक दिनचर्या थी । बताते हैं एक दिन रात्रि में उन्हें स्वप्न में भगवान शिव का दर्शन प्राप्त हुआ । नींद खुली तो किसी से चर्चा नही किए । अगले दिन फिर से स्वप्न आया । धीरे धीरे स्वप्न आने का सिलसिला ही चल पड़ा । एक दिन स्वप्न में ही इन्हें भगवान शिव के मंदिर निर्माण की प्रेरणा मिली । शिव गुलाम साव ने ईश्वर का आदेश मान कर पोखरे के किनारे स्थित अपनी जमीन पर भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित कराया । स्थापना के समय शिव मंदिर के नाम पर यह शिवलिंग केवल एक चबूतरे पर स्थापित किया गया था । भगवान शिव में शिव गुलाम का मन ऐसा रमा कि उन्होंने अपने व्यवसाय की कमाई का अधिकाधिक पैसा मंदिर मे ही लगाना शुरू कर दिया । धीरे धीरे अपनी क्षमता के अनुसार उन्होंने एक छोटा सा मंदिर बनवा डाला । शिव मंदिर के पास स्थित पोखरे पर एक पक्का घाट भी बनवाया ताकी शिव मंदिर की साफ सफाई तथा जलाभिषेक के लिए पानी सुगमता से श्रद्धालुओं को मिल सके । आस्था जुडती रही और पूजा पाठ के लिए लोगों की भीड़ लगने लगी । सुनसान विरान कहे जाने वाले स्थान पर अब चहल पहल शुरू हो गयी । लोग पोखरे में स्नान के बाद शिव जी का ध्यान करना नही भूलते थे । कुछ पहलवानी का शौक रखने वालों ने मंदिर के पीछे एक अखाड़ा बना लिया । पहलवानी के पहले मंदिर में भगवान नर्मदेश्वर की पूजा करना फिर रियाज करना परंपरा बन गयी । इस मंदिर की दिव्यता ने आम जन को ही नहीं बल्कि पहुंचे हुए संतों को भी आकृष्ट किया । अनेक संतों ने पोखरे के आसपास अपना डेरा डाल कर मंदिर परिसर में साधना की । कालांतर में मंदिर के जीर्ण होने पर शिव गुलाम के परिवार व मंदिर के श्रद्धालुओं ने एक भव्य शिवालय के रूप में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया । शिव गुलाम द्वारा बनवाया गया घाट उन्ही के नाम पर आज भी शिव गुलाम घाट के नाम से प्रसिद्ध है । आज भी नर्मदेश्वर महादेव के दरबार में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से अपना योगदान दे रहे हैं । कुछ नवयुवकों के श्रमदान से मंदिर परिसर में शोदार झाड़ियां लगाकर सुन्दरीकरण कर दिया गया है जिससे इस शिवालय की शोभा अद्वितीय दिखाईं देती है। कहा जाता है इस मंदिर में सच्ची श्रद्धा से मांगी गयी प्रत्येक मुराद पूरी जरूर होती है । सावन के महीने में मंदिर मे श्रद्धालुओ का ताता लगा रहता है। समान्य दिनो में भी प्रतिदिन पूजन अर्चन के लिए श्रद्धावानो से मंदिर भरा रहता है ।
कण कण में शिव श्रृंखला के अन्य लेख देखने के लिए लिंक को क्लिक करें
https://rashtrasandeshnews.in/shiv-baba-tarakeswar-nath-mahadev-pasahi-in-every-particle/
https://rashtrasandeshnews.in/shiv-baba-bhandeshwar-nath-mantigaon-in-every-particle/
https://rashtrasandeshnews.in/shiv-prakteshwar-mahadev-davak-in-every-particle/
