


“सही बोले हैं भइया !……बाकी अब का होगा भइया जी ? “
” देखो बिनोद ! अब परधान जी छेरे हैं तो पानी भी तो उहै डालेंगे न ?……..हमको लगता है जहां छेरे थे, वही जाकर पानी डाल आएंगे त सब साफ हो जाएगा “
“आपको क्या लगता है भूषन भइया ! परधान जी ऐसा करेंगे ? ”
“जानता है बिनोद ! हम परधान के विरोधी भलही हैं , बाकि हम जानते हैं परधान एतना गडबड आदमी नहीं है । उ जरूर कर देता बाकी जो उसके पास जो “पुष्पा राज” है ना….उ बार बार कहता है “झूकेगा नही साला”……..ए बदे हमको भी डाउट है “
” पुष्पा राज ? अब इ कौन है भइया ?
” अरे सलाहकार साहब , अऊर कौन “

” हं त भइया ! आप गजबे बोलते हैं……बाह रे “सलाहकार साहब”……. बाकि भूषन भइया हमारे दिमाग में एगो सवाल चल रहा है…..अगर परधान जी ‘पानी’ नही डाले अऊर पत्तकार माने नही त का होगा ? ”
“अब इसका जवाब हम तुमको अबहीं नही देंगे । बाद में बताएँगे का होगा…..अभी तो तुम चुनौटी निकालो, तलब हो रही है ”
” इ लीजिये भइया ! ”

