चंदौली। आएदिन समाचारों में सरकारी स्कूलों के बारे में पढ़ते सुनते हमारी दृष्टि और दृष्टिकोण दोनों ने ये स्वीकार कर लिया है कि सरकारी स्कूल मतलब सुविधाओं का टोटा, लापरवाह शिक्षक और दम तोड़ती शिक्षा । अगर आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं तो यक़ीनन आप ने अभी सरकारी स्कूलों को नहीं देखा है। आपने बस वही स्कूल देखें हैं जिसे कुछ लोगों द्वारा विकृृत मानसिकता से ग्रस्त हो कर दिखाया गया है। 

कायाकल्प के पहले स्कूल


सदर चंदौली का प्राथमिक विद्यालय गौरी  : 
           आज हम आप को ले चलते हैं चंदौली जनपद के सदर ब्लाक स्थित एक ऐसे स्कूल में जहाँ आज से लगभग छ: साल पहले सुविधाओं का वही हाल था जो आपने ढेर सारे अखबारों और चैनलों में देखा होगा । हम बात कर रहे हैं बबुरी क्षेत्र के गौरी प्राथमिक विद्यालय की । जहाँ मात्र छ: साल पहले खण्डहर की शक्ल में झाड़ियों और पेड़ो की झुरमुट से पटा यह स्कूल व्यवस्था को मुंह चिढा रहा था। परिसर में जहरीले सांप बिच्छुओ का आतंक आम था। बरसात के दिनों में परिसर मे भरे पानी के कारण स्कूल से बच्चों का सम्पर्क बिल्कुल टुट जाता था । छुट्टी के बाद स्कूल के भवन , दुनिया भर के अवैध कामों मे शरारती तत्वों द्वारा प्रयोग किए जाते थे । सब मिला जुला कर स्कूल में सुविधाएं और नामांकन दोनो नदारत थे । 

कायाकल्प के बाद स्कूल


नये प्रधानाध्यापक ने बदली सूरत : 
2015 में सरकार द्वारा शिक्षकों के ट्रांसफर का सिलसिला चला । लोग बदले , ग्राम प्रधान बदले और बदलने लगी स्कूल की तस्वीर । गौरी स्कूल पर प्रधानाध्यापक के रूप में तैनाती हुई बबुरी कस्बे के मूल निवासी मुहम्मद अय्यूब की । उन्होंने देखा कि पिछले स्कूल जैसी कोई बात इस स्कूल में नही है, एक बार तो मन खिन्न हुआ लेकिन जल्दी ही उन्होंने अपने आप को इसके लिए तैयार कर लिया । फिर उन्होंने शुरू किया बदलाव का सिलसिला। पहली बार जब उन्होंने स्कूलों के पारंपरिक रंग सफेद की जगह स्कूल के दिवारो को “रंग” दिया । विभाग में उनकी तारीफ के साथ ही उलाहना भी खूब हुई ।

मुहम्मद अय्यूब, प्रधानाध्यापक

हर लोगो के अलग अलग राय थे , किसी को यह प्रयोग बेहद भाया तो किसी को रास ही नहीं आया । मुहम्मद अय्यूब ने स्कूल की कायाकल्प का वीणा उठाया तो उन्हें तमाम परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। उन्होंने सबसे पहले ग्राम प्रधान से गुहार लगाई, शुरू में तो उन्होंने भी आश्वासन से ही काम चलाया लेकिन मुहम्मद अय्यूब के लगन और मेहनत को देखकर तत्कालीन ग्राम प्रधान हरिलाल पाल ने भी कायाकल्प को लेकर कमर कस लिया । अब स्कूल के दिन बहुरने की शुरुआत हो चुकी थी । परिसर में सबसे पहले झाड़ियों को काट कर पूरे परिसर को साफ बनाया गया।  फिर इण्टरलाकिग ईट बिछा कर स्कूल को गेट से जोड़ा गया । रास्ते के किनारों पर शो दार झाड़ियां लगाई गई। कक्षा के कमरों में प्रधानाध्यापक ने व्यक्तिगत पैसे से कुर्सियों व मेज की व्यवस्था की । ग्राम प्रधान ने पूरे कमरों में टाइल्स लगवा कर कमरों का रूप ही बदल दिया । 


2017 तक स्कूल बन गया माडल स्कूल  : 
           लगभग दो साल बीतते बीतते गौरी प्राथमिक स्कूल ऐसा बन गया कि वहां का बदला रूप देखने के लिए ग्रामीणों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया । जहा पहले बच्चो के पिता अपने बच्चों को इस स्कूल में भेजने से कतराते थे अब नामांकन के लिए आने लगे । मुहम्मद अय्यूब ने भी बच्चों के साथ भरपूर मेहनत की । बच्चों का शैक्षिक स्तर बढने लगा , अभिभावक प्राइवेट स्कूलों से निकाल कर अपने बच्चों का ऐडमिशन इस स्कूल में कराने लगे । एक प्रधानाध्यापक के रूप मे मुहम्मद अय्यूब ने बच्चों को सरकारी स्कूल में प्राप्त सुविधाओं से भी ज्यादा सुविधाएं देने का प्रयास किया।  इग्लिस मीडियम स्कूलों से नाम कटा कर आए बच्चों का टाई बेल्ट और आई कार्ड से लगाव देखा तो उन्होंने अपने स्कूल के प्रत्येक बच्चों के लिए टाई बेल्ट और आई कार्ड की व्यवस्था कर दी । स्कूल के आफिस में पुराने मेज की जगह नये मेज लगाए और उस पर पारदर्शी शीशा लगा कर जरूरी जानकारियों के कम्प्यूटराइज्ड प्रिन्ट लगाए । इसी बीच एक दिन तत्कालीन खण्ड शिक्षा अधिकारी अमित दूबे स्कूल पर पहुंचे । स्कूल की व्यवस्था को घंटों निहारने के बाद उन्होंने मेज पर शीशे और जानकारी के प्रिंट लगाने की बड़ी तारीफ़ की । स्कूल से जाने के बाद उन्होंने बकायदा शिक्षकों की मिटिंग रख कर गौरी स्कूल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की तथा सभी स्कूलों में नये मेज और शीशे लगाने का आदेश जारी किया।  

           आज गौरी स्कूल की स्थिति ये है कि यह स्कूल बड़े बड़े प्राईवेट स्कूल को पीछे छोड़ चुका है।  ऐसी कोई सुविधा नही है जो प्राइवेट स्कूल मे हो और इस स्कूल में न हो।  स्मार्ट क्लास के लिए बड़े डिस्प्ले की टीवी लगाई गई है।  परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गये हैं,  सभी कमरों में पर्याप्त प्रकाश के लिए लाइट तथा हवा के लिए पंखे लगे हैं। विद्युत आपूर्ति न होने पर असुविधा से बचने के लिए स्कूल में अच्छी क्षमता का इनवर्टर तथा सोलर पैनल लगा है । टाइल्स युक्त स्वच्छ शौचालय व मूत्रालय तथा पेयजल के लिए आरो की व्यवस्था है । परिसर को एक सुन्दर पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है । स्कूल में सुसज्जित लाइब्रेरी, क्लास रूम , आफिस,  किचन देखकर स्कूल के सभी शिक्षकों का परिश्रम मूर्त रूप में देखा जा सकता है।  बात की जाय शैक्षिक गुणवत्ता की तो इस स्कूल में पढने वाले ज्यादातर बच्चे सरकार द्वारा जारी प्रेरणा लक्ष्य को आज ही प्राप्त कर चुके हैं जबकि इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित अवधि सन् 2022 है । प्रधानाध्यापक मुहम्मद अय्यूब ने बातचीत के दौरान बताया कि स्कूल में उनके कई कार्य अभी प्रस्तावित हैं,  जिन्हें मूर्त रूप दिया जाना हैं। जिसके सम्बन्ध में ग्राम प्रधान व जनप्रतिनिधियों से बातचीत चल रही है।  


जिले के शिक्षा अधिकारियों की राय  : 
स्कूल की कायाकल्प और गुणवत्ता को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों में संतुष्टि का भाव है।  खण्ड शिक्षा अधिकारी सदर विजय प्रकाश यादव कहते हैं कि प्रधानाध्यापक मुहम्मद अय्यूब के मेहनत की बदौलत आज प्राथमिक विद्यालय गौरी जिले के  सर्वोच्च स्कूलों में स्थान रखता है। स्कूल के समस्त स्टाफ का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिलता है। सभी लोगों के प्रयास से आज विद्यालय सम्पूर्ण सुविधाओं से परिपूर्ण है। सभी  शिक्षक विद्यालय को भौतिक तथा शैक्षिक रूप से प्रतिदिन उत्तरोत्तर विकास दे रहे हैं। इसलिए सभी लोग धन्यवाद के पात्र हैं,  साथ ही विद्यालय के कायाकल्प के लिए सहायता देने वाले ग्राम प्रधान,  समाजसेवी तथा जनप्रतिनिधि गण का कार्य भी प्रसंसनीय है । 

आइए नजर डालें स्कूल के कुछ तस्वीरों पर

कार्यालय

पुस्तकालय

रसोई

क्लासरूम

सीसीटीवी कैमरे

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By AVP

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