
बीजेपी के रणनीतिकारों के दिमाग का कोई मुकाबला नहीं है। वह जोड़तोड़ में माहिर तो हैं ही साथ ही कहाँ चारा देना है किसे बे-चारा बना देना है। वह हर उस पहलू पर नज़र रखते हैं। यूपी के आंतरिक सर्वे में सूपड़ा साफ होते देख बीजेपी ने केंद्रीय सरकार में एक अदद मंत्रालय को तरस रहे ओबीसी समाज के अनुप्रिया भूपेंद्र वगैरह को लेकर 27 मंत्री बना दिया।
फिर ओबीसी आरक्षण खत्म कर विवाद होने पर उन्हीं को आगे कर पुनः लागू करवाने का क्रेडिट उन्हीं को थमा दिया।
इसके पहले यूपी पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर ब्लॉक प्रमुख पंचायत अध्यक्ष पर उन्हें बिठा दिया। ताकि वह अपने समाज को मोटिवेट कर बीजेपी के पाले में खींच सकें। अब रही संगठन की बात तो बीते कुछ दिनों से बीजेपी से बिदके कार्यकर्ताओं को संगठन में समायोजित करने के लिएफलाने मौर्या, ढेकाने पटेल, फलाने विश्वकर्मा,ढेकनवा कंहार को जोड़ने के लिए अपने सैकड़ो की संख्या में बने।

कानून एवं विधि प्रकोष्ठ,प्रबुद्ध प्रकोष्ठ, व्यवसायिक प्रकोष्ठ,चिकित्सा प्रकोष्ठ, आर्थिक प्रकोष्ठ,व्यापार प्रकोष्ठ, सहकारिता प्रकोष्ठ,पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ, बुनकर प्रकोष्ठ, शिक्षक प्रकोष्ठ,पंचायत प्रकोष्ठ, मछुआरा प्रकोष्ठ, स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ,एनजीओ प्रकोष्ठ, वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ,लघु उद्योग प्रकोष्ठ, शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ, प्रवासी सम्पर्क प्रकोष्ठ,रेहड़ी-पटरी व्यवसाय प्रकोष्ठ, श्रम प्रकोष्ठ, दिव्यांग प्रकोष्ठ ।
इसके अलावां अभी युवा मोर्चा,महिला मोर्चा के फलाने ढेंकाने मोर्चा प्रकोष्ठ बाकी है। साथ ही संघ युवा वाहिनी समेत तमाम हिन्दू संगठन के बाद प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री प्रचार प्रसार योजना।
मने कहीं न कहीं सबको समायोजित किया जा रहा है। ताकि उस समाज की नाराज़गी दूर हो। हालांकि ऐसे प्रकोष्ठों का बहुत महत्व नहीं है। चूंकि पार्टी सत्ता में है तो सबकी इच्छा होती है कि वह पदाधिकारी बने इसलिए उसे सहर्ष यह सब “बेजान से पद” स्वीकार होगा।
अभी बीजेपी चाट प्रकोष्ठ, पकौड़ी प्रकोष्ठ, समोसा प्रकोष्ठ, भी बना दे तो लोग उसमें भी पद पाने को लालायित होंगे।इस बात को विस्तारवादी बीजेपी बेहतर तरीके से जानती है। वह “पद का लॉलीपॉप” थमाकर अपना कद बढ़ाने में लगी है। क्योंकि जो भी व्यक्ति पद पायेगा वह बीजेपी के ही गुण गायेगा उसके लिए वोट मांगेगा,मंगवायेगा।
इस बात को अभी से ही विपक्षी दलों को समझ लेने की जरूरत है। जितना विस्तार जितना समायोजन होगा। उतना ही वह पार्टी जमीनी तौर पर मजबूत होगी।टीम बढ़ाकर उतना ही वह जनता को मोटिवेट कर सकेगी।
वरना तमाम नाकामियों के बावजूद बीजेपी अपनी मनचाही मुराद पा लेगी।अपने लिए ढोल पिटवा लेगी।
