बीकानेर Abhayindia.com लाभ पंचमी 18 नवम्‍बर को है। कार्तिक शुक्ल पंचमी को भारत के कुच्छ राज्यों में सनातनी लाभ पंचमी, सौभाग्य पंचमी कहते है तथा जैन धर्म मे इसे ज्ञान पंचमी के नाम से जाना जाता है। सौभाग्य और लाभ का मतलब क्रमशः सौभाग्य और लाभ से जुडा है।

गुजरात में, दिवाली उत्सव के पर्व का समापन लाभ पंचमी के होता है, और इस दिन शिव परिवार यानि शिवजी, माँ पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी, शुभ व लाभ की पूजा करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस दिन सर्वप्रथम सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्योदय के पश्चात सूर्य भगवान को अर्ध्य देकर शुभ मुहूर्त में भगवान शिव पार्वती, गणेश, कार्तिकेय व उनके पूरे गण की स्थापना कर गणेश जी का चन्दन, सिन्दुर, अक्षत वदूर्वा से पूजन किया जाता है। फिर भगवान शिव का पूजन चंदन, बेलपत्र, धतूरा व भस्म लगाकर फिर माँ पार्वती व कार्तिकेय व उनके गणों का पूजन कर माँ लक्ष्मी की वन्दना की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि लाभ पंचमी के दिन जो इस प्रकार पूजन कर घर से बाहर निकलते वक्त बाये हाथ की ओर लाभ तथा दायीं ओर शुभ का सिन्दुर से लिखता है उसके जीवन, व्यवसाय और परिवार में लाभ, आराम और सौभाग्य लाता है।

गुजरात में, अधिकांश दुकान मालिक और व्यापारी दिवाली उत्सव के बाद लाभ पंचमी पर अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को फिर से शुरू करते हैं. इसलिए गुजरात में, लाभ पंचमी गुजराती नव वर्ष का पहला कार्य दिवस है। इस दिन व्यवसायी नए खाता बही का उद्घाटन करते हैं, जिसे गुजराती में खाटू के नाम से जाना जाता है, बायी ओर शुभ, दायी ओर लाभ और पहले पृष्ठ के केंद्र में एक स्वास्तिक का चित्र अंकित कर अपना बहीखाता व व्यवसाय प्रारम्भ करते हैं।

लाभ पंचमी/ बीकानेर में पूजन मुहूर्त का समय
प्रातः 7:00 से 10:35 बजे तक।
-भैरव रतन बोहरा, ज्‍योतिषाचार्य, बीकानेर 

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By AVP

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