बबुरी चंदौली । सदर ब्लाक के मुस्तफापुर गांव में दो स्कूल के बीच नदी होने के कारण बच्चे जान जोखिम में डालकर बांस के वैकल्पिक पुल से नदी पार कर स्कूल जाते हैं । इस बात की जानकारी होने के बाद बुधवार की दोपहर पूर्व विधायक सैयदराजा मनोज सिंह डबलू ने गांव में पहुंच कर बच्चों तथा गांववासियों से बात की । जब बच्चों को पेड़ों के तनों से होकर गड़ई नदी को पार करते हुए देखा तो हतप्रभ रह गए।
ग्रामीणों से इसकी वजह पूछी तो उन्होंने गांव में स्कूल का ना होना कारण बताया। कहा कि गड़ई नदी पर पुल होता तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन आसपास नदी पर पुल नहीं होने के कारण जान जोखिम में डालना मजबूरी है। ग्रामीणों ने बताया कि यदि यह जोखिम न उठाएं तो बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे। बारिश के मौसम में नदी में उफान के कारण बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। पूर्व विधायक ने प्रदेश सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार के चंदौली के सांसद तथा विधायक दावा करते हैं कि हर जगह उन्होंने पुल बना दिया है । लेकिन जहां छोटे छोटे बच्चे जान खतरे में डालकर नदी पार कर पढाई करने जाते आते हैं वहां केवल आश्वासन का पुल काम कर रहा है । उन्होंने कहा कि बास की टटरी बांध कर ग्रामीणों द्वारा बनाया गया पुल भी पानी बढ़ने पर बह गया , अब तो और भी स्थिति खराब हो चुकी है । एक गिरे हुए पेड़ के सहारे बच्चे नदी पार कर रहे हैं । यदि बच्चों के साथ नदी पार करते समय कोई घटना हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा । जहां सैकड़ों ग्रामीणों की आवश्यकता है वहां सरकार केवल आश्वासन से काम चला रही है । 

नदी पार करते समय नदी में गिर पड़े डब्लू —–
स्कूल की छुट्टी होने पर नदी के किनारे पेड़ के पास नदी पार करने के लिए बच्चों को प्रतीक्षा करते देख पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू खुद ही पेड़ पर चढ़कर नदी पार करने लगे । लेकिन नियंत्रण नहीं रख पाए और नदी में गिर गए । इसके बाद कमर तक पानी में उतर कर बच्चों के पास पहुंचे तथा बातचीत की ।
बच्चों ने कहा पेड़ से नदी पार करने में अक्सर गिर जाते हैं हम ——
पूर्व विधायक मनोज सिंह से बात करते हुए तकिया स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि नदी पार करते समय फिसल कर हम लोग अक्सर नदी में गिर जाते हैं । पानी कम रहता है इसलिए बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं होती । पानी बढ़ने पर नदी पार करने में डर लगता है इसलिए हम लोग स्कूल नहीं जा पाते हैं ।
आंगनवाड़ी स्कूल के बच्चे भी पेड़ के सहारे पार करते हैं नदी —-
मुस्तफापुर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित नहीं होता इसलिए आंगनबाड़ी के बच्चे भी गिरे हुए पेड़ के सहारे नदी पार करके तकिया गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं । आंगनवाड़ी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे 6 वर्ष से भी कम होते हैं । इसलिए इन बच्चों को नदी पार करने में और भी ज्यादा खतरा होता है ।
