एपिसोड 3 : बनारस से दिल्ली
धारावाहिक मैं आंखे खोलते हुए ऐसे अलसाये तरीके से उठा जैसे मैं गहरी नींद में था। और उसने मेरी नींद में खलल डाल दिया हो। उसपर नजरें गयीं तो भौचक…
धारावाहिक मैं आंखे खोलते हुए ऐसे अलसाये तरीके से उठा जैसे मैं गहरी नींद में था। और उसने मेरी नींद में खलल डाल दिया हो। उसपर नजरें गयीं तो भौचक…
धारावाहिक टिकट चेक करते हुए टीटी बोला दिल्ली जा रहे हो, सुनो ट्रेन में कोई दोस्ती गांठने की कोशिश करे तो सतर्क रहना। किसी का कुछ लिया दिया खाना पीना…
एपिसोड 1 घर से सफारी के क्लोन वर्जन सोफारी अटैची में दो चार कपड़े लत्ते चारखने वाला लाल गमछा। सिबाका टॉप ब्रश मंजन और सलेक्शन की चिट्ठी के साथ निकल…
☠ कमजोर दिल वाले जरूर पढ़ें ! रात के 2 बजने को है, नींद न आने की वजह से मैं बिस्तर पर पड़ा करवट बदल रहा था।सरराहट के साथ हवाएं…
अपना समाज आजकल भोत शिष्ट हो चुका है।आजकल के समाज लोग शराब पीने वालों को शराबी बेवड़ा न कहकर “अल्कोहलिक” कहने लगे हैं।मने हमारे जमाने की दारू अब लिकर,ड्रिंक,अल्कोहल जैसे…
सुब्बे-सुब्बे उठते ही मूड का मसाईमाड़ा हो जाता है। आंखे अखरोट की माफ़िक गोल और बेडौल हो जाती हैं। करेजा धुकधुका कर धुंआ फेंकने लगता है। भुजाएं फड़ककर फरक्का मेल…
हे हपर पुलुस हधिछक साहेब…काहे बुर्रा मान रिये हैं…हेतना जादा बुर्रा लगने का मल्लब है…अर्रे थोड़ा बर्दास्त फ़र्दास्त करो…तुम बड़का साहेब हो तो का हुआ…हो तो जात से दल्लीत ही…
एक दिन हम मुहं लटकाये जात रहेन तब से पीछे से कोई आके बोला धप्पा… हम पलट का देखे तो अपने जोगी जी थें। हम कहें का ये जोगी जी…
एकदम ठिक्क कहा…केन्र सर्रकार ने। सच्चाई में राज्ज़ा हरीशचन्द को फेल्ल कर दिया। हाँ…वाकई कोरोना में कोई हाक्सीजन की कमी से नहीं मरा…सब जानबूझकर मरे हैं। सब मौजी सरकार से…
बामुलाहिजा होशियार…जिल्ले हिलाही…भक्तिमो शान शहशांह…फेके “56” के जनक…हमबानी हडानी के अघोषित साढ़ू…पाइरेटेड टै’गोर पधार रहे हैं।(दुदुम्भी की आवाज)…पों पो पों….(खुद बैठते हुए) भाईयों बैनो…बैठ जाईये…अपने जागिए हिन्नुओं को जगाइए…देखिये… हिन्नु…