Category: एक्सक्लूसिव

भूषन भइया ! सुने हैं परधान त माफिए नहीं मांगे हैं

“का बिनोद ! बड़ा दिन बाद दिखाई दिए…….कहीं चले गये थे का ? डबुरी के लोग बड़ा याद कर रहे थे तुमको ।” “अरे नहीं भइया, इधर बरसात थोड़ा बढ़िया…

जानता है बिनोद ! प्रधान जी पत्रकारों को खूब गरियाए हैं

“देख रहा है ना बिनोद ! डबुरी में क्या चल रहा है ।” “क्या हुआ भूषन भैया “ “अपने प्रधान जी जो हैं , कल का पत्रकारों को मां बहन…

देख रहा है न बिनोद ! डबुरी में का चल रहा है

” देख रहा है न बिनोद ?…. इ डबुरी का ग्राम प्रधान कैसा खेला कर रहा है !…..विकास के काम के नाम पर तो एकदम फिसड्डी है….बाकी रोड पर अतिक्रमण…

दरबार ए मुग़लिया की दीवाली

लेख : डॉ मोहम्मद आरिफ इतिहासकार और सामाजिक चिंतक दीवाली का जश्न पौराणिक के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का प्रतीक है. शास्त्रों में इसे मान्यता भी प्राप्त है और इस त्योहार…

काशी का लोलार्क कुण्ड : जहाँ देवासुर संग्राम के दौरान भगवान सूर्य के रथ का पहिया गिरा था

विश्व के प्राचीनतम जीवित नगरों में से एक आध्यात्मिक एबं धार्मिक नगरी वाराणसी है। वाराणसी ब्राह्मण, बौद्ध एवं जैन धर्मावलम्बियों के तीर्थ के रूप में सुबिख्यात रहा है | धर्मशास्त्रों…

हरितालिका तीज : सौभाग्य, सुहाग का त्यौहार

धर्म-कर्म भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि हरितालिका तीज के रूप में मनाई जाती है । इस बार 9 सितंबर को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज पर 14 वर्ष…

“पत्रकार” ही हैं शोसल मीडिया के भी रिपोर्टर , तुच्छ समझने में चौथे स्तम्भ पर दरारें हो रही गहरी

चंदौली । जनप्रतिनिधियों द्वारा आएदिन पत्रकारों पर फर्जी केस मढे जाने का सिलसिला नया नही है । सत्ता के नशे में चूर प्रतिनिधि पत्रकारों के अधिकारों का हनन लगातार करते…

हम पुलिस हैं साहब , खुशी के हकदार नही होते , क्योंकि हमारी जिन्दगी में कोई इतवार नही होते

रक्षाबंधन का पर्व हो और बहन भाई साथ न हों तो कैसा लगता है ? यह प्रश्न किसी ऐसे ही अभागे से पूछ लिया जाए तो निश्चय ही उसका दर्द…

हजरत इमाम हुसैन की याद ज़िन्दा रखने को मनाया जाता है मुहर्रम

इस्लाम में मुहर्रम को गम का महीना माना जाता है। मुस्लिम समाज खासकर शिया समुदाय के लोग इस माह के नौवें या दसवें दिन रोजा रखते हैं। मुहर्रम में पैगम्बर…