Bikaner. Abhayindia.com राजस्थान साहित्य चेतना मंच की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी नारायण आचार्य का राजस्थानी नूतन काव्य बीकैजी रो बीकाण का लोकार्पण धरणीधर रंगमंच में आयोजित समारोह में राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति अकादमी के अध्‍यक्ष शिवराज छंगाणी ने किया।  राजस्थान साहित्य चेतना मंच के अध्यक्ष जुगल किशोर पुरोहित ने बताया कि लक्ष्मी नारायण आचार्य की इस कृति में बीकानेर रियासत के उन विषयों पर प्रकाश डाला गया है जो कि अब तक आमजन से अछूते रहे है।

ये पुस्तक बीकानेर के अतीत का पथ-प्रदर्शन करती है। आचार्य ने लोकार्पण के दौरान अपनी राजस्थानी कविताओं का वाचन भी किया। साहित्यिक गतिविधियों में संलग्न आचार्य को (बंधु) भी कहते है आपने कवि चौपाल में अपनी कविताओं का वाचन किया है। जानकी नारायण श्रीमाली कार्यक्रम में वरिष्ठ अतिथि थे।

कथाकार एवं संस्कृतिकर्मी जानकी नारायण श्रीमाली ने बताया कि अतीत हमारी जड़ है और जब कलमकार इतिहास की गवाही देती घटनाओं पर लेखन करें तो ये एक सुखद अनुभूति हो जाती है इसलिए लक्ष्मी नारायण आचार्य (बंधु) को इनके नूतन राजस्थानी पद्य काव्य के लिए मैं बंधाईयाँ देता हूँ। विशिष्ट अतिथि नेमचंद गहलोत ने लक्ष्मी नारायण आचार्य का कवि चौपाल की ओर से सम्मान किया। स्वागत भाषण रेखा आचार्य व्याख्याता विधि विभाग डूँगर कालेज ने दिया। डा कृष्ण लाल विश्नोई और यश आचार्य युवा आर्टिस्ट ने भी कृति पर विचार प्रकट किए। अजय शंकर आचार्य ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रेम नारायण व्यास, मदन व्यास, गिरिराज हर्ष, रवि विश्नोई, सुशील छंगाणी, केदारनाथ आचार्य, विजय शंकर आचार्य, हरिकिशन व्यास, के के व्यास, बबला महाराज सहित अनेक साहित्य-अनुरागी उपस्थित रहे ।

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By AVP

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