
जिले की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान को बचाने की मुहिम शुरू
जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर परिसर को मतगणना केंद्र बनाए जाने के जिला प्रशासन के आदेश का पुरजोर विरोध शुरू हो गया है। इससे शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। एक तरफ सरकार शिक्षा में सुधार के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर जोर दे रही है दूसरी ओर विश्वविद्यालय को मतगणना केंद्र बनाकर उसके आंतरिक ढांचे को ध्वस्त करने का काम जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। देश में कोरोना की लहर को देखते हुए विद्यार्थियों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन को निर्णय पर पुनर्विचार करने चाहिए।बताते चले कि हर जिले में मतगणना का केंद्र मंडी परिषद होता है। यहां भी मंडी परिषद है फिर भी जिला प्रशासन ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को मतगणना केंद्र बनाने के आदेश की खबर पढ़कर जिले के शिक्षाविद् परेशान हैं। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्वपोषित विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय ने अपने संसाधनों से अपना आंतरिक ढांचा मजबूत किया है । इसमें प्रदेश सरकार का कोई भी योगदान नहीं है। पूरे जिले में पूर्वांचल विश्वविद्यालय का भवन और परिसर एक अपनी अलग पहचान बनाए है, जिसमें शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर- दूर से लोग आते हैं। इससे जुड़े पांच जिला के लगभग 850 महाविद्यालय हैं। इनकी परीक्षा कराने की और समय से परीक्षाफल देने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय पर ही हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय से लगातार राजभवन और शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होती है।विश्वविद्यालय के पास एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार वार्षिक परीक्षा कराने, परिसर में सेमेस्टर परीक्षा हर 6 महीने पर कराने और मूल्यांकन कराकर समय से रिजल्ट देने का भी दबाव रहता है। इन दबावों के बीच अगर परिसर में मतगणना केंद्र बनता है तो यह सीधे-सीधे सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति की योजना पर कुठाराघात होगा। इसे किसी भी हाल में जिले के शिक्षाविद् और बुद्धिजीवी बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिला प्रशासन को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए कि वह विश्वविद्यालय में मतगणना केंद्र न बनाएं। इससे एक बहुत बड़ी शिक्षा की आबादी वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। इसके लिए विकल्प के रूप में उसके पास तमाम महाविद्यालय है, जो कि सुरक्षा मानकों को भी पूरा करते हैं। इस जिले का इतिहास मुगलकाल से ही तालीम देने का रहा है।विश्वविद्यालय पर नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ-साथ नैक मूल्यांकन कराने की भी जिम्मेदारी है। इसके लिए परिसर में तमाम तैयारियां की जा रही है ताकि नैक के मूल्यांकन के हिसाब से विश्वविद्यालय अपनी तैयारी पूरी करे और उसकी सभी कसौटियों पर खरा उतरे। ऐसे में अगर विश्वविद्यालय में मतगणना स्थल बनता है तो नैक के हिसाब से तैयारियां पूरी नहीं हो पाएगी और पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी। साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग और संकायों में यूजीसी के तमाम प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इस पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। इससे यह योजना प्रभावित होगी। साथ ही विश्वविद्यालय में कोविड की लहर को देखते हुए इस पर जिला प्रशासन और शासन को ध्यान देने की जरूरत है।
