आचार्य ज्योति मित्र की विशेष रिपोर्ट/ बीकानेर। हाल ही में पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी भाजपा में घर वापसी व जोधपुर एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गर्मजोशी से हुई मुलाकात राजनीतिक हलकों में चौंकाने वाली रही। राजनीति के पंडित इसे भाटी को तवज्जो मिलने की शुरुआत बता रहे हैं। भाजपा ज्वाइन करने के बाद पहली बार बीकानेर आने पर जयपुर से लेकर बीकानेर होते हुए श्रीकोलायत तक भाटी के स्वागत में जनता का जो हुजूम उमड़ा उससे भाजपा कार्यकर्ताओं के चेहरे खिल गए। इस माहौल में भाजपा संगठन के कई पूर्व पदाधिकारी यह कहते हुए सुने गए की पार्टी का यह देर से लिया गया सही निर्णय है।

राजनीति के जानकार कहते है ये भाटी का करिश्मा ऐसे ही नहीं बना है। लगातार किसी न किसी मुद्दे को लेकर जनता के साथ खड़े रहने वाले भाटी की सतत सक्रियता ही उनकी पूंजी है। भाटी की कमाई यह पूंजी ही आज उनके स्वागत में पलक पावड़े बिछा रही है।  अपनी विधायक़ी के पहले कार्यकाल में विधानसभा में एक दलित बालिका मंजू के साथ बलात्कार व उसकी हत्या के मामले को जिस अंदाज में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर को घेरा उसकी चर्चा आज भी गाहे बेगाहे होती रहती है।

इसी तरह विपक्ष में रहते हुए जब भी अकाल पड़ा तो भाटी ने जनता को साथ लेकर बड़े आंदोलन को खड़ा कर दिया। नतीजे में सरकारों को झुकना पड़ता व भाटी की अधिकांश मांगे सरकारों को माननी ही पड़ती। भाजपा के पूर्व पार्षद सुनील बांठिया बताते हैं कि 90 के दशक में जब भाटी को अकाल के समय सरकारी सहायता नाकाफी लगी तो वे अकाल ग्रस्त ग्रामीणों की सहायता के लिए झोली लेकर सड़कों पर उतर आए उसे समय इस शहर के भामाशाहों से लेकर आम व्यापारियों ने भाटी की झोली में लाखों रुपए डालें जो अकाल पीड़ितों के काम आए।

कोलायत के भल्लूरी गांव में गरीबों के झोपड़े अग्निकांड की भेंट चढ़े तो भाटी ने अपने  प्रभाव का इस्तेमाल कर दानदाताओं के सहयोग से उनके लिए पक्के मकान तैयार करवा दिए। ऐसा ही एक हादसा बीकानेर शहर के सोनगिरी कुआं क्षेत्र में हुआ था वहां पर भी भाटी ने पीड़ितों के मकान वापस बनवाकर लोगों के दिलों में अपना स्थान बना लिया।

भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रामकिशन आचार्य कहते हैं आज जो विकास की बात की जा रही है वास्तव में विकास तो देवीसिंह भाटी के कार्यकाल में ही हुआ। भाटी शेखावत सरकार में नहर मंत्री बने तो कोलायत के गांव ढाणी तक नहरों का जाल बिछा दिया। अपने कार्यकाल में टेल तक पानी पहुंचाने का महत्ती कार्य भाटी जैसा दबंग राजनेता ही कर सकता था। ठंडे बस्ते में पड़ी नहर परियोजनाओं को भाटी ने फाइलों से निकालकर जमीन पर उतारा इसका लाभ आज कोलायत के किसान ले रहे हैं।

कोलायत जैसलमेर के हजारों गैर खातेदार किसानों को सिंचित क्षेत्र की 280 बीघा की खातेदारी अधिकार स्वीकृत करवाये जो कि भारत के किसी भी राजस्व कानून में आज भी कोई भी प्रावधान नहीं है।

प्रत्येक ढाणी गाँव की मांग पर विधालय को जोड़ा। सिंचित क्षेत्र में जहां खरीफ फसल की बुवाई मुश्किल होती थी, वहां पक्के खालों के ऊपर ईंटों को कवर करवा कर सिंचित क्षेत्र की स्थायी बढ़ोतरी की।

प्रत्येक ढाणी अनुकूलता की मांग पर की अनेक हेंड पंप बनवाये। पूरी कोलायत तहसील के कम व खारे पानी के नलकूपों के गाँव तथा अन्य सभी गावों को गजनेर व कोलायत लिफ्ट नहरों से पेयजल योजनाएं स्वीकृत करवा कर पेयजल संकट समाप्त करवाया। गौरतलब है प्रदेश में किसी तहसील में पूरे गाँव पानी नहीं जुड़े है। यही भाटी जब विपक्ष में थे तो नहरी पानी की कमी की हमेशा ही बुलंद आवाज रहे।

अपनी स्थापना के बाद से ही बीकानेर में बीजेपी अपने पैर कभी नहीं जमा सकी थी। भाटी ने जब जनता दल दिग्विजय का भाजपा में विलय करवाया। बीकानेर जिले की भारतीय जनता पार्टी में उन्होंने एक नई जान फूंक दी। उस समय भाटी ने मजबूती के साथ विधानसभा में प्रवेश कर शुरुआत की। यह वही दौर था जब लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के लिए एक दूर की कौड़ी थी। वो भाटी ही थे जिन्होंने बीकानेर लोकसभा सीट पर  महेंद्र सिंह भाटी को सांसद बनवाकर भाजपा का खाता खोला। महेंद्र सिंह भाटी भले कुछ समय के लिए ही सांसद रहे लेकिन इस छोटे से कार्यकाल में ही वर्षो से बीकानेर फलौदी रेल लाइन को जोड़ने के लिए जो सफलतम प्रयास किया। इसका लाभ आज तक लाखों लोग उठा रहे हैं। पूर्व महाराजा स्व. करणी सिंह जी ने भी सांसद  रहते हुए ये मांग उठाई थी। बीकानेर, जोधपुर व फलोदी के लोगों के वर्षों की मांग को लेकर स्व. जसवंत सिंह जसोल को साथ लेकर दोनों बाप व बेटे ने 111km रेल लाइन को स्वीकृति दिला दी। वहीं, एक वर्ष में गुजरात को पंजाब से जुड़वा दिया। भाटी भाटी अन्य राजनेताओं से जुदा है। गायों के वोट नहीं लगते लेकिन गोचर संरक्षण के लिए लंबा आंदोलन व गोचर की ऐतिहासिक दीवार के निर्माण कार्य से भाटी रातों-रात प्रदेश भर के गौ प्रेमियों की आंखों के तारे बन गए।

राजनीति के पंडितों का मानना है 4:30 साल तक भारतीय जनता पार्टी से दूरी के बावजूद भाटी अपने जिस एजेंडे को लेकर आंदोलनरत रहे उससे न सिर्फ संघ वरन भाजपा आलाकमान भी प्रभावित हुआ। जिसकी सुखद परिणति जोधपुर हवाई अड्डे पर देखने को मिली प्रधानमंत्री मोदी ने गर्मजोशी से भाटी के हाथों को थाम कर कहा आप अब तक कहां भटक रहे थे मैं तो आपको टोकने वाला था अच्छा किया आप वापस आ गए।

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By AVP

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