
“देख रहा है ना बिनोद ! डबुरी में क्या चल रहा है ।”
“क्या हुआ भूषन भैया “
“अपने प्रधान जी जो हैं , कल का पत्रकारों को मां बहन की गाली दिए हैं ।”
“काहे भैया ?”

“काहे देंगे ! पत्रकार ने एगो खबर छापी थी उनके खिलाफ । उनको गुस्सा आ गया तो जाकर मां बहन एक कर दिए ।”
“अरे भैया तब तो बड़ा दिक्कत हुआ होगा । पत्रकार का बोले ?”
“लाओ चुनौटी दो ।…….पत्रकार सब गए थे डबुरी थाना पर, तहरीर दिए हैं । एफ आई आर दर्ज हो रहा हैं ।”
“अच्छा !…… बाकि हुआ का था भूषन भैया ? “

“होगा का बिनोद।…….कुछ दिन पहले प्रधान जी गोलगप्पा का दुकान खोले थे , तो गोलगप्पा का स्टाल और बोर्ड आधा रोड पर तक लगा दिए । अब एगो पत्रकार देखा तो छाप दिया । फिर तो परधान जी पूरा उबल गये , पहुंचे घर पर, अऊर जमकर बहिनिया मतरिया कर दिए । “
“अच्छा । भूषन भैया , डबुरी में प्रधान जी अऊर सब जो काम कराए हैं, आप बता रहे थे कि उम्मे भी बड़ा गड़बड़ घोटाला हुआ है । पत्रकार तो उहो सब छाप सकता है ना ?”

“घबराता काहे है बिनोद ? आगे आगे देखो का होता है ।…..जानते हो ? पत्रकार सब मधुमक्खी से कम नहीं होता है, छोपरिया जाएगा न,….त प्रधान जी मोटा कर तुंबा बन जाएंगे ।….. कोई बता रहा था कि मिडिल स्कूल का जो चारदीवारी बना है ना उसमें भी बड़ा गड़बड़झाला किए हैं । पुरानके ईटा निकालकर लगा दिए हैं और कागज में दिखाए हैं कि नया ईटा लगा है । जानते हो नयका ईटा कहां है ?…..उनके घर में लगा है । आऊर खेला जानते हो ? पोखरा में भी जो चारदीवारी था पहले का, वह सब तोड़कर उसी ईटा को दोबारा लगाए है और कागज पर फिर दिखाएंगे कि नया इटा से बाउंडरी हुआ है,….. समझे ! “

“अरे भूषण भैया, हम तो जनबे नहीं करते थे कि प्रधान जी इतना बड़ खेलाडी हैं । “
“एक बात और जानते हो बिनोद ! उनके एक सलाहकार साहब हैं , जो सब राय वही देते हैं । काल्ह वाले मैटर में सब सुलझ गया था बाकि आखरी समय में उहे सब गुड गोबर कर दिए । “
“अब कुछ-कुछ हमहूं समझ रहे हैं भैया जी ।…..जो सलाहकार को कह रहे हैं ये वही सेल्फी वाले भैया जी हैैं न , जो फोटो खिच के दूसरे के काम का केरडीट ले लेते हैं ।”
“समझ तो गए तुम बिनोद ।…..चलो इ लो अपना चुनौटी पकड़ो । यह मत कहना कि फिर से भूषण भैया चुनौटी रख लिए ।”
“अरे का कह रहे हैं भैया जी । चलिए……

