

” देख रहा है न बिनोद ?…. इ डबुरी का ग्राम प्रधान कैसा खेला कर रहा है !…..विकास के काम के नाम पर तो एकदम फिसड्डी है….बाकी रोड पर अतिक्रमण करके अपना बिजनेस बढ़ाने में कितना माहिर है ? ”

“अरे भईया , असलकी प्रधान तो घरही में रहती हैैं , कामकाज तो उनके पतिए देखते हैं,….अब टिकुली- बिन्दी का खर्चा निकालने खातिर कमाना तो पड़बे करेगा न ! ”
“अरे तो उसके लिए पूरा रोड छेक के अतिक्रमण करना जरूरी है का ? बिजनेसय देखना था तो परधानी का करे थाम लिए ?…..जा के देखो भंशीपुर में नाली का पटिया टूटा पड़ा है ।….. फिरकुटिया का कुटिया पर वाला रस्ता देखो, बरसात में कनई किच्चा का घर हुआ पड़ा है । उससे तो उनको कौनो मतलब है नहीं । बस हर टाइम नौटंकी करना है । ”

” हां भूषन भइया । बात तो आप सहीए कह रहे हैं ।स्टेट बैंक वाला जो रस्ता है न , अभी कुच्छे दिन पहले बना था, सब धस के छितर- भीतर हो गया है ।काल्ह मगरूआ का लइका सइकिल से गिर गया , आगे का दुगो दतवय टूट गया, बड़ी गरिया रहा था परधान जी को ।”
” इ बताओ बिनोद ! गरिआएगा नहीं ? अब उसके लइका का दांत टूट गया । शादी ब्याह में दिक्कत होगा कि नहीं ?…… प्रधान चुना है तो काम नहीं लेगा ? प्रधानी हुए इतना दिन हो गया, का कर रहे हैं बताओ ?……लाओ चुनौटी दो……….प्राइमरी स्कूल में जाकर देखो ‘करेम की झाड़ी’ से पुरा फिल्ड पटा हुआ है , रोज किरा बिच्छी दिखाई देता है । कौनो बच्चा को काट लेगा तो किसका जिम्मेदारी होगा !…..सफाईकर्मी भेजना है नहीं ! उनसे प्राइवेट काम कराना है बस । गांव का कौनो काम करा रहे हैं ?, तुम्हीं बताओ ”

” ठीक ही बोल रहे हैं, भूषन भैया । बाकी कुछ काम भी तो हुआ ही है , अभी कुच्छे दिन हुआ गंदा नाला साफ कराए हैं , पोखरा का बाउंडरी करा रहे हैं । घाट भी बनवाए हैं, कल देखे थे बड़ा बढ़िया लग रहा था । ”
” तुम नहीं समझोगे बिनोद !….बहुत खेला हो रहा है । पोखरा का जो बाउन्डरी हो रहा है न, उसमें भी बड़ा घालमेल है, बाद में बताएँगे ।…..और गंदा नाला का तो बातै मत करना ।…..जोगी जी का कुच्छै दिन पहिले आदेश आया था कि स्कूलन में साफ सफाई का विशेष ध्यान देना है , अब प्राइमरी स्कूल के फिल्ड में ठेगुना तक गंदा नाला का पानी भरा था , और मास्साब लोग रोज रोज जिला का चक्कर काट रहे थे , तब जाके आनन-फानन में अधिकारी लोग परधान को बोला के आडर दिए हैं तब सफाई हुआ है, समझे ? ”

” कुछ कुछ समझ गये भइया ।……बाकि अपने को का करना है । हम तो गरीब लोग हैं भैया । आइए चला जाए ”
” चलो, बाकि आख कान खोल के रखो….चलते हैं ।”
” भइया चुनौटिया ?……”
“अरे हाँ… इ लो भुला के जेबा में रख लिए हैं । ”
” ही ही ही…..एही लिए हम स्टील वाला चुनौटीया नहीं लेते । भुलाता बहुत है न भैया , महंगा पड़ता है । “
