चावल की ढेरी बनाएं एक मिट्टी के बर्तन में थोड़े से जौ बोएं और इसका ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें । कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएं कलावा बांधे । एक नारियल लेकर उसके ऊपर चुन्नी लपेटे और कलावे से बांधकर कलश के ऊपर स्थापित कर कलश के अंदर एक साबूत सुपारी अक्षत सिक्का डालें । अशोक के पत्ते या आम के पत्ते को कलश के ऊपर रखकर नारियल रखते हुए मां दुर्गा का आव्हान करना ना भूलें । दीपक जलाकर कलश की पूजा करें स्थापना के समय आप, सोना ,चांदी ,तावा,पीतल, मिट्टी के किसी भी कलश का इस्तेमाल  कर सकते हैं । कलश का महत्व 
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में पहला दिन बहुत महत्वपूर्ण है । प्रतिपदा के दिन नवरात्रि के पहले दिन ही कलश की स्थापना की जाती है । ऐसा मानते हैं यह भगवान विष्णु का रूप है ।इसीलिए नवरात्रि पूजा से पहले घट स्थापना कलश की स्थापना की जाती है ।
महाअष्टमी कब है 
इस साल महाअष्टमी 13 अक्टूबर बुधवार के दिन पड़ रहा है । ज्योतिषचर्या पं. विशाल पोरवाल के अनुसार इस साल चतुर्थी तिथि का क्षय होने से शारदीय नवरात्र 8 दिन की पड़ रहे हैं । ऐसे में 13 अक्टूबर 2021 की अष्टमी व्रत रखना उत्तम है । नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है । 
मुहूर्त 
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार अष्टमी व्रत 12 अक्टूबर को रात्रि 9 बजकर 45 से शुरू है और 13 अक्टूबर को 8 बजकर 7 मिनट पर समाप्त हो जाएगी । पंचांग के अनुसार इस साल महा नवमी तिथि 14 अक्टूबर 2021दिन (गुरुवार) को पड रही है । नौवीं के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है ।
1- पहला दिन 7 अक्टूबर 2021मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है 2- दूसरा 8 अक्टूबर 2021मां ब्रह्मचारिणी की पूजा 3- तीसरा दिन 9 अक्टूबर 2021मां चंद्रघंटा मां कुष्मांडा की पूजा 4- चौथा दिन 10 अक्टूबर 2021 मां स्कंदमाता की पूजा 5- पांचवा दिन 11 अक्टूबर 2021मां कात्यायनी की पूजा 6- छठा दिन 12 अक्टूबर 2021मां कालरात्रि की पूजा 7- सातवां दिन 13 अक्टूबर 2021महागौरी की पूजा 8- आठवां 14 अक्टूबर 2021 मां सिद्धिदात्री  की पूजा9- नौवां दिन 15 अक्टूबर 2021 दशमी परायण दुर्गा/ विसर्जन 
अर्थात— कन्या पूजन अष्टमी नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है । कन्या पूजन वाली कुमारी पूजा नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है । कुंवारी कन्या पूजन, कुंवारी पूजा के नाम से भी जाना जाता है । धार्मिक ग्रंथों में नवरात्रि के सभी 9 दिन में कुंवारी पूजा का सुझाव दिया जाता है । नवरात्रि के पहले दिन केवल एक कन्या की पूजा करनी चाहिए और प्रत्येक दिन एक कन्या को जोड़ना चाहिए धार्मिक ग्रंथों के अनुसार 2 वर्ष से 10 वर्ष की कन्या कुमारी पूजन के लिए उपयुक्त होती है  2 से 10 वर्ष की लड़कियां मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं । 
क्वारी, त्रिमूर्ति ,रोहिणी ,काली,चंडिका, शांभवी ,दुर्गा,भद्र और सुभद्रा  आदि नाम से जाना जाता है ।इनका पूजन करने से जीवन में सुख समृद्धि तथा पुत्र प्राप्ति व सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । इससे जीवन में आने वाली सभी परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है ।

आचार्य पं विशाल पोरवाल

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By AVP

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