

बेसिरपैर के अंटशंट बयानों के बादशाह बन चुके हैं सपा के शफीकुर्रहमान बर्क
सूबे की चुनावी दंगल में तो हर दल दांवपेंच आजमा रही है। मगर दो ही पार्टी प्रमुख रूप से आमने सामने भिड़ंत को अंजाम देने को आतुर हैं। सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल सपा।इसलिए दोनों दल एक दूसरे की कमियों खामियों बयानों पर नजर रख रहे हैं।ताकि एक दूसरे के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। इस वक्त किसी भी दल के किसी एक “जिम्मेदार” का गैरजिम्मेदाराना अंटशंट बयान उसके दल के लिए भारी पड़ सकता है। और ऐसे अंटशंट बयानों के एक बादशाह कहे जाते हैं। संभल से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क। वैसे तो बर्क हर मौके हर विषय पर कुछ भी मनमर्जी से बोल जाते और किरकिरी करवाते हैं। इनके पूर्व के बयानों को देखेंगे तो बहुत से बयान अतार्किक और हास्यास्पद हैं।
उसी क्रम में बोलते हुए शफीकुर्रहमान रहमान बर्क ने तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे पर अपने बयान से सही ठहराते हुए कहा की जब अपना देश भारत ब्रिटिशराज के कब्जे में था, तब हमारे देश ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। अब तालिबान अपने देश को आजाद करके चलाना चाहता है। तालिबान एक ऐसी ताकत है जिसने रूस और अमेरिका जैसे मजबूत देशों को भी अपने देश में बसने नहीं दिया। बर्क उस तालिबान का समर्थन कर रहे हैं जो अपनी कट्टरता और क्रूरता के लिए जाना जाता है। तालिबान ने अफगानिस्तान क़ब्जाते ही क्रूरता की कई मिसालें पेश कर दी।
अगर शफीकुर्रहमान बर्क ऐसे ही उटपटांग बयान देते रहें तो आगामी चुनाव को देखते हुए सपा के लिए एक नकारात्मक माहौल बना रहे हैं क्योंकि भारत के अधिसंख्यक लोग किसी भी सूरत में क्रूर कट्टरपंथी तालिबानियों का समर्थन नहीं करते।
