
वाराणसी । बनारस में अमरूद के बागों से तरक्की की राह निकली है। ऐसी राह जो बनारस में पर्यटन को नई रफ्तार देगी। तरक्की की नई राह ढूंढी है चोलापुर प्रखंड के बबियांव निवासी शैलेंद्र रघुवंशी और इनके अनुज सौरभ रघुवंशी ने। इनके पास करीब बीस बीघे में अमरूद का बाग और नर्सरी है। यहां अमरूद की लोकप्रिय प्रजातियां- ललित, श्वेता, संगम, जी.विलास, इलाहाबाद सफेदा, इलाहाबाद सुर्ख, ग्वालियर 27 और पंत प्रभात के पेड़ तो लहलहाते ही हैं, थाईलैंड की थाई ह्वाइट और ताइवान पिंक का भी जलवा है। शैलेंद्र की जयश्री नर्सरी में हर साल अमरूद के करीब चार लाख पौधे तैयार किए जाते हैं। एप्पल बेर समेत बनारस की विलुप्त प्रजातियों के फलदार पौधे भी यहां तैयार किए जाते हैं।जयश्री बाग और नर्सरी को दोनों भाइयों ने टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाने की योजना तैयार की है।
एग्री टूरिज्म के तहत जल्द ही यहां फल-फूल के अलावा मछली पालन, कला प्रदर्शनी से लेकर योगा जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस बाग में मनोरंजन से जुड़ी कई सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। वालीबाल और बैडमिंटन कोर्ट के अलावा झूले भी लागए जाएंगे। शानदार लान बनाने की तैयारी चल रही है। यहां पर्टयकों को मत्स्य आखेट की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए दो तालाब बनवाए गए हैं। तालाबों के भीटे पर बैठकर पर्यटक मछलियों का आखेट और उनके साथ अठखेलियां कर सकेंगे।जयश्री बाग और नर्सरी से पर्यटन को नई रफ्तार तो मिलेगी ही, इससे किसानों की आमदनी में इजाफा भी होगा। वाराणसी के किसानों को खेती के तौर-तरीके सीखने का अवसर मिलेगा।फलोद्यान, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मछली पालन, सैरीकल्चर, कैंपिंग सुविधाएं, अस्तबल, कला प्रदर्शनी के लिए हॉल, पर्यटकों के लिए कॉटेज, रेस्टोरेंट, योगा हॉल, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के अलावा खेल सुविधा केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां जल्द ही गिफ्ट शॉप का निर्माण भी किया जाएगा, जिसमें अचार, जैम-जेली, मुरब्बा आदि की बिक्री भी की जाएगी। पर्यटकों को ठहरने के लिए वातानुकूलित आवास बनाए जाएंगे और लान भी। कर्मचारी आवास, स्वीमिंग पूल जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। बाग में ठहरने वाले पर्यटकों के मनोरंजन के लिए ओपन एरिया थिएटर भी रहेगा।

प्रयोगवादी बागबान हैं शैलेंद्र
बनारस के शैलेंद्र सिंह का मन पढ़ाई में नहीं लगा तो बागबानी शुरू शुरू कर दी। स्नातकोत्तर करने के बाद उसी में रम गए। इनके ग्रीन हाउस में तैयार किए गए अमरूद के पौधे सिर्फ यूपी ही नहीं, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गुजरात से लगायत उत्तरांचल के तमाम बागों में लगाए गए हैं। नार्थ ईस्ट के राज्यों में भी इनके पौधों की बहुत अधिक डिमांड है। अगले साल से अमरूद के पांच लाख पौधे तैयार कर देश भर में बेचने की योजना है। शैलेंद्र सिर्फ पौधे ही नहीं बेचते, किसानों के सपने भी जगाते हैं। उनके बागों का रख-रखाव का जिम्मा भी उठाते हैं। जब तक पौधे फलने नहीं लगते, तब तक वो समय-समय पर पहुंच पहुंचकर उनकी देख-भाल भी करते हैं। दरअसल, शैलेंद्र खुद बागबानी, क्षत्र प्रबंधन और नर्सरी प्रबंधन में दक्ष हैं। कई सालों से वो किसानों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। शुरुआती दिनों में अमरूद से तीस हजार पौधे तैयार करते थे। बाद में दायरा इतना ज्यादा बढ़ा लिया कि वो अब बागबानों की डिमांड पूरी नहीं कर पाते हैं। जयश्री नर्सरी में तैयार किए गए अमरूद के पौधे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सिरसा स्थित राणिया फार्म हाउस में ललित और श्वेता प्रजाति के करीब दस हजार पौधे रोपे गए हैं। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम के फार्म हाउसों में भी शैलेंद्र की नर्सरी के पौधे रोपे गए हैं, जो अब बड़े बाग का आकार ले चुके हैं। एसपी कंपनी ने गुजरात और महाराष्ट्र के तमाम बागों में अमरूद के पौधों का रोपण कराया है। अरुणाचल और मणिपुर सरकारें भी जयश्री बाग से अमरूद के पौधे खरीदती रही हैं। असम और त्रिपुरा में भी अब अमरूद के पौधों की आपूर्ति करते हैं। 
कई राज्य कर चुके हैं पुरस्कृत
अमरूद उत्पादक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र रघुवंशी उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ में रिसर्च एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी हैं। साल 2012 में शैलेंद्र रघुवंशी को बागबानी का सबसे बड़ा एसपीएलएम पटेल अवार्ड मिला था। अवार्ड के रूप में एक लाख रुपये और प्रमाण-पत्र दिए गए थे। साल 2014 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन्हें सम्मानित किया था। पुरस्कार के रूप में पचास हजार रुपये की धनराशि भी दी थी। पंजाब सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी इन्हें अवार्ड और एक लाख रुपये का पुरस्कार दे चुके हैं। 
दूसरों से अलग क्यों?
शैलेंद्र रघुवंशी अब बागबानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सघन बागवानी पर जोर दे रहे हैं। पूर्वांचल के जो किसान अमरूद की नई प्रजातियों से अनभिज्ञ थे, उनमें जागरुकता अभियान चला रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सघन बागबानी में सफलता मिली है। मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली में अब बड़े पैमाने पर अमरूद के बागों में सघन बागबानी की जा रही है। प्रूनिंग के जरिए बागबान हर साल अमरूद की अच्छी फलत ले रहे हैं।शैलेंद्र रघुवंशी अपनी नर्सरी में काले अमरूद के पौधे भी तैयार करते हैं। जामुनी रंग वाले काले अमरूद के पौधे भी तैयार करते हैं और बेचते हैं। साथ ही बनारस में मशहूर रहे फलों की विलुप्त हो रही प्रजातियों के पौधों की एक अलग नर्सरी बनाई है। इस नर्सरी में बनारसी नीबू, प्योर बनारसी लंगड़ा आम, बनारसी नीबू, बनारसी बेल, बनारसी शरीफा, बनारसी जामुन, बनारसी मुसम्मी के पौधे भी रोपे गए हैं। यही नहीं, बाबा विश्वनाथ को चढ़ाया जाने वाला बनारसी चंदन भी जयश्री बाग और नर्सरी में उगाया जा रहा है। इन्हीं पेड़ों से पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
