रिपोर्ट : राजीव कुमार सिंह
वाराणसी । शहर के सुंदरपुर नेवादा स्थित संतुष्टि मेडिकल कालेज के हेड आफिस पर विगत 21 जुलाई से धरनारत छात्र -छात्राओं ने कालेज से डीएलडब्ल्यू तिराहे तक प्रशासन तथा मेडिकल कालेज की निदेशिका डॉ रितु गर्ग का पुतला खच्चर पर बैठा मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया ।
छात्रों ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि 2018 मे ही कालेज की सी सी आई एम से मान्यता रद्द होने के बावजूद कालेज प्रबंधन ने झूठ बोलकर हमारा एडमिशन लिया । पैसे लेकर अब तक हमारी तीन से साल से मेडिकल कालेज प्रबंधन द्वारा परीक्षा नही कराई जा रही है । इस मामले की शिकायती पत्र स्थानीय थाने से लेकर शासन प्ररशासन के सभी जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों तक भेजा गया लेकिन उनके द्वारा शिकायत का सज्ञान न लेना तथा मामले पर लीपापोती करके कालेज प्रबन्धन को बचाना इस बात की ओर इशारा कर रही है कि डॉ रितु गर्ग के रसूख के आगे पूरा वाराणसी प्रशासन नतमस्तक है । जबकि मामले के सबूत सहित सभी शिकायती पत्र प्रशासनिक स्तर पर दिये जा चुके है ।ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हमारे साथ हुए इस धोखाधड़ी के मामले में शासन और प्रशासन निष्पक्ष जांच नही करना चाहती । इसलिए प्रशासन को जगाने के लिए हमे इस तरह के कदम उठाने ही पड़ेंगे जो न्याय मिलने तक जारी रहेगा ।
अभिभावक से जबरजस्ती स्टाम्प पर मेडिकल कालेज प्रबंधन ने कराया हस्ताक्षर
संतुष्टि मेडिकल कालेज की धांधली का एक -एक परत खुलने के बावजूद प्रशासन का पक्षपात पूर्ण रवैया किसी के भी गले उतर नही रहा है । मिर्जापुर के 2019 बैच में अपने बेटे अमन कुमार सिंह को एडमिशन दिलाने के लिए एक अभिभावक अखिलेश सिंह से एडमिशन के नाम पर 3 लाख से अधिक रुपये एवं हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की ओरिजिनल मार्कशीट मेडिकल कालेज प्रबन्धन द्वारा बंधक रख लिया गया ।कालेज के फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर पिछले एक महीने से अभिभावक अपने पैसे और कागजात के लिए कालेज के मुख्यालय का चक्कर लगा रहा था । अंततः 6 अगस्त को कॉलेज के मुख्यालय पर जब अखिलेश सिंह अपने बेटे अमन सिंह का एडमिशन निरस्त कराने के लिए पहुंचे तो कालेज प्रबंधन ने उनपर कागज न लेने का दबाव बनाते हुए पहले उनसे मुकदमा दर्ज न कराने सम्बंधित अन्नापत्ति स्टॉम्प पर हस्ताक्षर कराया । आरोप है कि हस्ताक्षर कराने के बाद पैसा न लौटाकर, उनसे जबरजस्ती अन्य दस्तावेजो पर भी हस्ताक्षर कराया गया । उसके बाद उनके बेटे का शैक्षणिक प्रमाण पत्र दिया गया । जब उनसे इस मामले पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नही हूं ,पैसे से ज्यादा मुझे मेरे बच्चे के शैक्षणिक कागजात और आधार कार्ड की जरूरत थी । कालेज प्रबन्धन द्वारा मुझ पर दबाव बनाते हुए मजबूर करके स्टॉप पर हस्ताक्षर कराया गया कि मेरा पैसा मिल गया है और आगे मैं कोई मुकदमा दर्ज नही कराऊंगा । मैं कम पढ़ा लिखा हूँ, कागजात बंधक बनाए जाने कारण मेरा बच्चा कही एडमिशन नही ले पा रहा था इसलिए मुझे इस दबाव के कारण समझौता करना पड़ा ।
आकाओ के आगे अधीनस्थ मजबूर
संतुष्टि मेडिकल कालेज द्वारा छात्रों से धोखाधड़ी के मामले पर सुहेलदेव जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश सिंह “बबलू” ने जब चितईपुर एस एच ओ से मामले की जानकारी लेकर प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच किए जाने का अनुरोध किया तो एस एच ओ चितईपुर ने बताया कि मामला हाईकोर्ट में होने के कारण हम लोग इसपर कोई निर्णय नही कर पा रहे है । जब सर्वेश सिंह “बबलू” ने एस एच ओ चितईपुर से बच्चो के साथ न्याय करने का आग्रह किया तो उन्होंने कहा कि मामला उच्च स्तर का है ,जिसमे उच्च अधिकारियों द्वारा कोई आदेश न मिलने से हमारी भी विवषता है । इससे पूर्व भी यही बात चौकी प्रभारी सुंदरपुर विनय तिवारी द्वारा भी कहा जा रहा था ।अब सवाल यह है कि जब संतुष्टि मेडिकल कालेज अपनी मान्यता को लेकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एव अन्य के विरुद्ध जब वाद दाखिल किया है तो फिर मान्यता रद्द होने के बावजूद एडमिशन लेकर धनउगाही क्यों किया ? छात्रों का कहना है कि संतुष्टि मेडिकल कालेज का विवाद 2018 से उनकी मान्यता को लेकर है ,और हमारा मामला सीधे अंधेरे में रखकर हमारे साथ धोखाधड़ी करने का है । अब उस मामले से हमारे साथ हुए धोखाधड़ी से कोई संबंध नही है । इस सम्बन्ध में तहरीर देने के बावजूद न तो प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और न ही इसकी जांच की जा रही है ,बल्कि पुलिस और प्रशासन न जाने किस दबाव में हमारी समस्याओं पर ध्यान नही दे रही है । जबकि धोखाधड़ी का पर्याप्त साक्ष्य हमारे द्वारा डी एम वाराणसी से लेकर जिले के सभी आला अधिकारियों को दिया गया ,परन्तु उन्होंने प्रकरण से पूरी तरह मुँह मोड़ लिया है । इस विषय की भी जांच होनी चाहिए कि वाराणसी प्रशासन किसके दबाव में है ?
