रिपोर्ट : राजीव कुमार सिंह
रात्रि में नही रुकते अपने घरों में दलित परिवार
वाराणसी/आजमगढ़। आजमगढ़ में जिला पंचायत चुनाव को लेकर उपजे विवाद और पुलिसिया ताँडव के बीच आजमगढ़ जनपद के गोधौरा गांव के दलित बस्ती में करीब 150 से ऊपर परिवार आजमगढ़ के पुलिस के खौफ़ से रात्रि में अब अपने घरों में नही रुकते । पुलिस के खौफ से अब दलितों ने गांव से पलायन की योजना बना लिया है । सबसे गंभीर विषय यह है कि इस मामले पर न तो शासन की ओर से ही कोई कारवाई हुई और न ही विपक्ष इस मामले पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार है । ऐसे में यह अत्यंत सोचनीय स्थिति है कि इन दलित परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा ?
विवाद का विषय
जिला पंचायत के चुनाव के बाद आजमगढ़ में चल रही 2-3 मई को मतगणना में भाजपा में वर्तमान मंत्री दारा सिंह चौहान के एक करीबी रिश्तेदार रंजना चौहान एवं गोधौरा गांव की दलित महिला जमुनती देवी के मध्य चुनाव में धांधली एवं मतगणना सम्बन्धी विवाद को लेकर दलितों ने अपना विरोध प्रकट करते हुए प्रदर्शन और नारेबाजी कर दिया था ।
दलितों का यह प्रदर्शन स्थानीय जिला प्रशासन को इतना नागवार लगा कि वे 4 मई के रात्रि में गोधौरा गांव की दलित बस्ती में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ के नेतृत्व में करीब 150 परिवारों पर धावा बोल दिया ,पुलिसिया तांडव का यह सच जब मीडिया द्वारा नंगी आँखो से देखा गया तो यह तांडव पूरा नंगा सच साबित हुआ ,पुलिस ने महिलाओं ,बच्चों ,लड़कियों ,पुरुषों,विकलांगो एवं बुजुर्गों पर ऐसा कहर बरपाया कि उनके जख्म आज भी दिख रहे है ।,दलित बस्ती के लोगों के अनुसार पुलिस ने 4 मई को कई संगीन धाराओं में कुल 33 लोगों को जेल भेज दिया जिसमें 13 महिलाएं भी शामिल थी ।इसके अलावा पुलिस ने करीब बीस नाबालिग बच्चों को जहानागंज थाना में 3 दिन तक भूखे रखते हुए जेल में रखा ,उसके बाद भी करीब तीन महीने तक रोज गोधौरा की दलित बस्ती में पुलिसकर्मी आते रहे और धनउगाही के साथ-साथ महिलाओं और बच्चियों पर जुल्म ढहाते रहे ।मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने कुछ दिन तक इस मामले को ठंडे बस्ते में रखा । लेकिन बीते 1 अगस्त की मध्य रात्रि पुलिस उस गांव में फिर धमक पड़ी और दलितों पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया ,महिलाएं और बच्चियां झाड़ियों में किसी तरह छिपकर अपनी जान और आबरू की रक्षा की ।,पुरुषों ने तो रात में ही गांव से पलायन शुरू कर दिया जो खबर लिखे जाने तक अनवरत जारी है ।महिलाएं और बच्चियां अब रात में अपने घरों में भी नही सोती उन्होंने गांव छोड़कर अन्यत्र ठिकाना बना लिया है ।रात शुरू होते ही दलित सपरिवार अपने -अपने घरों को छोड़ देते है ।और अन्यत्र स्थानों को अपना ठिकाना बनाकर सुबह होने का इंतजार करते है ।गांव के दलितों में पलायन करने वालों में अब तक दिलीप ,दिनेश ,विद्यासागर ,अवधेश ,कतवारू राम ,इंदल राम , आंनद कुमार,रामबली राम ,लक्ष्मण राम , प्रभूनाथ राम आदि ने सपरिवार अपना गांव छोड़ दिया है ।
1अगस्त की मध्य रात्रि पुलिस के खौफ से गांव के रामजीत राम ने अपने छत से छलांग लगा दिया जिसकी वजह से उनका पैर और कुल्हा फ्रैक्चर हो गया है ।आजमगढ़ के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था लेकिन चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति के कारण उन्हें इलाज के लिए कानपुर रेफर कर दिया जहाँ उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है ।
दलितों ने बातचीत करते हुए यह बताया कि हमारा जीवन पुलिस ने पूरी तरह से दूभर कर दिया है , या तो सरकार हमे न्याय दे या फिर इच्छामृत्यु क्योंकि जब लोगों की रक्षा करने वाली पुलिस से ही खतरा हो जाये तो हम अपनी गुहार किससे लगाएंगे कैसे अपने परिवार की सुरक्षा कर पाएंगे ? 
इस मामले पर जब एस एस पी आजमगढ़ सुधीर कुमार सिंह से 1 अगस्त के मध्य रात्रि के करीब की घटी घटना के बारे में पूछा गया तो पहले अनभिज्ञता जाहिर किए ,फिर बोले कि पुलिस वांटेड को पकड़ने गई है , लेकिन थोड़ी ही देर में फिर खुद फोन करके बताए कि पुलिस उस गांव से लौट रही है । अब सवाल यह उठता है कि गोधौरा गांव के दलित किन संगीन अपराधों के मुलजिम है कि पुलिस रात्रि में ही सभी छापे मारती है ? जबकि तश्वीरें इस बात की गवाही दे रही है कि पुलिस ने बाकायदा गोधौरा गांव की करीब 150 घरो में जो लूटपाट मचाया है वह अपराधी को पकड़ने की नही बल्कि विद्वेष की भावना से लूटपाट, महिलाओं से बदसलूकी ,बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार और नाबालिगों को जेल में रखना ,पुलिस की दलितों के प्रति उनकी विद्वेष की मनोदशा को जाहिर कर रही है 
विपक्ष मौन क्यों ?
आजमगढ़ के गोधौरा गांव में हुए पुलिसिया कहर के मामले में कांग्रेस ने आजमगढ़ के पलिया और गोधौरा कि कड़ी को जोड़ते हुए गोधौरा गांव में दलित महापंचायत रखा था ।उसके बाद पुलिस ने कुछ दिन मामले को ठंडे बस्ते में रखा और पुनः 1 अगस्त को मध्यरात्रि फिर जुल्म ढाना शुरू कर दिया ।हालांकि इस मामले में दलित हितैषी बसपा सुप्रीमो मायावती के द्वारा न तो कोई आवाज उठाई गई और न ही उनके जिलाध्यक्ष आजमगढ़ अरविंद कुमार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया ।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आजमगढ़ के सांसद और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है ,ऐसे में अब गोधौरा के दलित किससे इंसाफ मांगेंगे ?
