(चंदौली) । बाढ़ की विभिषिका झेलने के बाद भी किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खेतों में धान की फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक लेखपालों द्वारा किसानों के नुकसान का आकलन नहीं किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसान बताते हैं कि बाढ़ के कारण लंबे समय तक खेतों में पानी भरा रहा, जिससे धान की पौधे सड़ने लगे हैं । खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि जब तक नुकसान का निरीक्षण और आकलन नहीं होगा, तब तक उन्हें राहत या मुआवजे की उम्मीद नहीं की जा सकती। इससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। बाढ़ के चलते पहले ही वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और अब फसल बर्बाद होने से स्थिति और गंभीर हो रही है। इस बार बाढ़ में फसल के बर्बाद होने के बाद 25 प्रतिशत भी उपज होने की सम्भावना नहीं है ।किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र गांवों में लेखपाल भेजकर नुकसान का सर्वे कराया जाए, ताकि समय रहते राहत सामग्री और मुआवजे की व्यवस्था हो सके। 
